ईरान के शाहेद ड्रोन हमलों के बाद भारत ने तेज की लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन परियोजनाएं
ईरान-इज़राइल युद्ध में शाहेद ड्रोन के व्यापक इस्तेमाल के बाद भारत ने स्वदेशी लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन प्रोजेक्ट शेषनाग और प्रोजेक्ट केएएल के विकास और परीक्षण को तेज कर दिया है।
पश्चिम एशिया में ईरान और इज़राइल के बीच जारी युद्ध में ड्रोन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ने भारत की रक्षा योजनाओं को नई दिशा दी है। ईरान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे कम लागत वाले शाहेद ड्रोन ने आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी के मानवरहित हथियारों की अहमियत को और स्पष्ट कर दिया है।
इसी पृष्ठभूमि में भारत ने अपने स्वदेशी लंबी दूरी के स्ट्राइक ड्रोन कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। हाल ही में भारत के नए स्ट्राइक ड्रोन शेषनाग ड्रोन की हाईवे से लॉन्चिंग से जुड़ी परीक्षण तस्वीरें सामने आई हैं। यह परीक्षण पिछले सप्ताह किया गया और इसे भारत के रक्षा अनुसंधान प्रयासों में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा भारत ने शाहेद ड्रोन जैसी क्षमता वाले एक अन्य स्वदेशी प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट केएएल को भी तेज गति से विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत वाले ड्रोन बड़ी संख्या में हमले कर दुश्मन की हवाई सुरक्षा प्रणाली को चुनौती दे सकते हैं और दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक लक्ष्य भेद सकते हैं।
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इसी कारण भारतीय सैन्य योजनाकार अब स्वदेशी ड्रोन क्षमताओं को तेजी से विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि शेषनाग और प्रोजेक्ट केएएल दोनों ड्रोन के परीक्षण तेज कर दिए गए हैं और इन्हें असामान्य परिस्थितियों, जैसे हाईवे से लॉन्चिंग, में भी परखा जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार शेषनाग-150 ड्रोन की ऑपरेशनल रेंज 1,000 किलोमीटर से अधिक है और यह पांच घंटे से ज्यादा समय तक हवा में रह सकता है। यह ड्रोन लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर मंडराते हुए निगरानी कर सकता है और जरूरत पड़ने पर हमला भी कर सकता है।
न्यू स्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित यह ड्रोन 25 से 40 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम है, जिससे दुश्मन के ठिकानों, वाहनों और सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
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