पश्चिम एशिया युद्ध से सबक: भारत को मजबूत वायु रक्षा प्रणाली बनानी होगी – पूर्व वायुसेना प्रमुख
पूर्व वायुसेना प्रमुख वी.आर. चौधरी ने कहा कि पश्चिम एशिया युद्ध से भारत को सबक लेना चाहिए और ड्रोन खतरे से निपटने के लिए मजबूत वायु रक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी (सेवानिवृत्त) ने कहा है कि भारत के लिए सबसे बड़ा सबक एक बेहद मजबूत वायु रक्षा प्रणाली तैयार करना है। उन्होंने कहा कि देश को अधिक हथियार प्रणालियों, रडार और आधुनिक तकनीकी क्षमताओं के साथ अपनी हवाई सुरक्षा को और मजबूत करना होगा।
नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान बातचीत में वी.आर. चौधरी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक संघर्षों, खासकर यूक्रेन और पश्चिम एशिया में ड्रोन का उपयोग तेजी से बढ़ा है और भविष्य के युद्धों में ड्रोन की भूमिका बहुत बड़ी होने वाली है। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी युद्ध में जीत हासिल करने के लिए केवल ड्रोन पर निर्भर नहीं रहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि ड्रोन मौजूदा सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन युद्ध जीतने के लिए पारंपरिक हथियार प्रणाली और मजबूत वायु रक्षा नेटवर्क भी उतना ही जरूरी है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हवाई हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे वैश्विक विमानन, तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर गंभीर असर पड़ा है।
बेंगलुरु स्थित थिंक टैंक ‘सिनर्जिया’ द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में भारत और पड़ोसी देशों के रक्षा विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में किया गया है।
सम्मेलन में अपने मुख्य भाषण के दौरान वी.आर. चौधरी ने कहा कि भारत को एक मजबूत नेटवर्क आधारित रक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिसमें सेंसर, हथियार, प्लेटफॉर्म और साइबर क्षमताएं एक ही राष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी हों। इससे किसी भी बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियान में देश की सामूहिक सैन्य शक्ति का प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।
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