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राष्ट्रपति मुर्मू से मिले INDIA गठबंधन के नेता, चार मांगों वाला ज्ञापन सौंपा; राहुल गांधी बोले- राष्ट्रपति ने मांगे वोट चोरी के सबूत

INDIA गठबंधन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चार मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने वोट चोरी के आरोपों के सबूत मांगे हैं।

INDIA गठबंधन के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात कर कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर चार मांगों वाला ज्ञापन सौंपा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों के सबूत मांगे हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन अपने पास मौजूद साक्ष्य राष्ट्रपति को सौंपेगा।

ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को तत्काल रोकने, कागजी मतपत्रों की वापसी और पिछले दो वर्षों में हुए उन विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की गई, जिनमें विपक्ष के अनुसार वोट चोरी के निर्णायक सबूत मिले हैं। गठबंधन ने मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने की भी मांग की।

इससे पहले विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने विजय चौक पर उन्हें रोक दिया। कई नेताओं ने वहीं धरना दिया, जबकि प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने पहुंचा।

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प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, सुप्रिया सुले, मनोज झा, थोल तिरुमावलवन, ई.टी. मोहम्मद बशीर, एम.ए. बेबी और डी. राजा शामिल थे।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ने लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाकर मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेगा और ज्ञापन सौंपेगा।

मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग दोहराई। ममता बनर्जी ने कहा कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की चिंताओं पर विचार करने और उपलब्ध सबूतों की जांच करने की बात कही है।

विपक्ष मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। चुनाव आयोग ने पहले कहा था कि संस्थागत चर्चाओं में अलग-अलग राय होना सामान्य है और उसके आदेश कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।

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