भारत-चीन सीमा पर शांति बेहद जरूरी, एफसीआरए संशोधन विधेयक जेपीसी को भेजने की तैयारी
भारत ने चीन से लगी सीमा पर शांति और स्थिरता को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। केंद्र सरकार एफसीआरए संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की तैयारी में है।
भारत ने चीन के साथ लगी सीमा पर शांति और स्थिरता को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय क्षेत्र में चीनी सैनिकों का प्रवेश दोनों देशों के संबंधों के लिए गंभीर मुद्दों में से एक है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने द्वि-साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत ने चीन के साथ होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में लगातार इस बात पर जोर दिया है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमा पर हालात का असर व्यापक रूप से भारत-चीन संबंधों पर भी दिखाई देगा।
जयसवाल ने कहा कि सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों को बातचीत और स्थापित तंत्रों के माध्यम से सुलझाना जरूरी है। भारत का रुख है कि सीमा क्षेत्रों में किसी भी तरह की ऐसी गतिविधि, जिससे तनाव बढ़े, दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकती है।
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वहीं, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में विधेयक को वापस लेने की मांग उठ रही है। तमिलनाडु विधानसभा ने इसके विरोध में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है।
इसके अलावा मिजोरम की राजधानी आइजोल में भी विधेयक के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। विभिन्न संगठनों और समूहों ने केंद्र सरकार से विधेयक को वापस लेने की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार, इन विरोधों के बीच केंद्र सरकार ने अपने सहयोगी दलों और अन्य राजनीतिक दलों को बताया है कि वह बुधवार को लोकसभा में एक प्रस्ताव लाएगी। इसके जरिए एफसीआरए संशोधन विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी के पास भेजने की सिफारिश की जाएगी। समिति विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा करेगी और आगे की प्रक्रिया पर अपनी रिपोर्ट देगी।