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पांच वर्षों बाद नाथू ला दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार फिर होगा शुरू, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई गति

पांच वर्षों बाद नाथू ला दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार अगले महीने फिर शुरू होगा। साथ ही विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा से द्विपक्षीय सहयोग और संवाद को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सिक्किम स्थित नाथू ला दर्रे के माध्यम से भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार आगामी माह की पहली तारीख से पुनः शुरू होने जा रहा है। वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण इस व्यापार को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था। लगभग पांच वर्षों के बाद व्यापारिक गतिविधियों की बहाली से सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

नाथू ला दर्रे के पुनः खुलने के अवसर पर भारत और चीन के अधिकारियों की उपस्थिति में औपचारिक उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा। सीमा व्यापार के फिर से शुरू होने से पंजीकृत व्यापारियों, परिवहन संचालकों, स्थानीय कारोबारियों तथा इससे जुड़े अन्य व्यवसायों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। इससे दोनों देशों के बीच सीमापार व्यापार को भी नई गति मिलेगी।

गौरतलब है कि नाथू ला दर्रे के माध्यम से व्यापार वर्ष 2006 में चार दशक से अधिक समय तक बंद रहने के बाद दोबारा शुरू किया गया था। इसके बाद यह मार्ग भारत-चीन व्यापार और सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया। कोविड-19 महामारी के कारण लगाए गए प्रतिबंधों के चलते व्यापार एक बार फिर रोक दिया गया था।

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इसी बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने आज चीन की अपनी आधिकारिक यात्रा शुरू की। यात्रा के दौरान उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उपमंत्री सुन हाईयान से मुलाकात की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की। बैठक में दोनों देशों की प्राथमिकताओं से जुड़े मुद्दों के समाधान के साथ-साथ राजनीतिक, जन-से-जन, शैक्षणिक और थिंक-टैंक स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

विदेश सचिव ने चीन की जन राजनीतिक परामर्श सम्मेलन की 14वीं राष्ट्रीय समिति के उप महासचिव होंग लियांग से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने राजनीतिक और जनस्तरीय संपर्क बढ़ाने तथा द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत बनाने के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा व्यापार की बहाली और उच्च स्तरीय कूटनीतिक संवाद भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

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