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चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा क्यों है चिंता का कारण? बढ़ती निर्भरता का क्या जोखिम है?

भारत-चीन व्यापार घाटा बढ़ने से आर्थिक और रणनीतिक जोखिम बढ़े हैं। भारत आयात पर निर्भरता घटाने के लिए स्वदेशी उत्पादन और वैकल्पिक साझेदारियों पर जोर दे रहा है।

भारत और चीन के बीच व्यापार असंतुलन लगातार गहराता जा रहा है, जिससे सरकार की चिंता बढ़ी है। भारत बार-बार इस मुद्दे को उठाता रहा है कि चीन से होने वाला आयात तेजी से बढ़ रहा है, जबकि भारतीय उत्पादों को चीनी बाजार में गैर-व्यापारिक बाधाओं (Non-trade Barriers) का सामना करना पड़ रहा है।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। भारत का आयात कई गुना बढ़ गया है, जबकि निर्यात अपेक्षाकृत स्थिर या धीमी गति से बढ़ रहा है। यह बढ़ता घाटा इस बात का संकेत है कि भारत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों, जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा कच्चा माल, मशीनरी और रसायनों के लिए चीन पर निर्भर होता जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्भरता न केवल आर्थिक जोखिम पैदा करती है बल्कि रणनीतिक चुनौतियाँ भी उत्पन्न करती है। यदि किसी कारण से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है, तो भारत के विनिर्माण और औद्योगिक उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए और आयात पर निर्भरता कम हो। इसके तहत “आत्मनिर्भर भारत” अभियान और उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के जरिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

हालाँकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि अल्पावधि में चीन पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है। इसलिए, दीर्घकालिक रणनीति के तहत तकनीकी विकास, नए व्यापार साझेदारों की तलाश और भारतीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर जोर देना जरूरी है।

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