भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम मंजूरी की ओर बड़ा कदम, यूरोपीय आयोग ने परिषद को भेजा प्रस्ताव
भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को लागू करने की दिशा में यूरोपीय आयोग ने परिषद को प्रस्ताव भेजा। मंजूरी से बाजार पहुंच, शुल्क और व्यापार निवेश नियमों में बड़ा बदलाव होगा।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यूरोपीय आयोग ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से यूरोपीय परिषद के सामने भारत के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर और इसे अंतिम रूप देने का प्रस्ताव पेश किया।
यदि यूरोपीय परिषद इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो यह भारत और यूरोपीय संघ दोनों के लिए अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता होगा। भारत और यूरोपीय संघ ने जनवरी में इस समझौते के निष्कर्ष की घोषणा की थी, जिसे दोनों पक्षों के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया।
यूरोपीय आयोग के अनुसार, समझौता लागू होने के बाद बाजार तक पहुंच बेहतर होगी, शुल्क कम होंगे, अनावश्यक व्यापार बाधाओं को दूर किया जाएगा और भारत तथा यूरोपीय संघ के बीच व्यापार एवं निवेश के लिए अधिक निश्चित नियम उपलब्ध होंगे।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच पहले से ही हर वर्ष 180 अरब यूरो से अधिक के वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है। इससे यूरोपीय संघ में करीब आठ लाख नौकरियों को समर्थन मिलता है।
समझौते के तहत भारत को होने वाले यूरोपीय संघ के 96 प्रतिशत वस्तु निर्यात पर शुल्क खत्म या कम किया जाएगा। यूरोपीय आयोग के मुताबिक, इससे यूरोपीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क में हर वर्ष लगभग 4 अरब यूरो की बचत होगी।
व्यापार और आर्थिक सुरक्षा आयुक्त मारोस सेफकोविच ने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है। दोनों मिलकर करीब 2 अरब लोगों का बाजार और वैश्विक जीडीपी का लगभग एक-चौथाई हिस्सा रखते हैं।
उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ चाहता है कि कारोबारी और नागरिक इस समझौते के ठोस लाभ जल्द महसूस करें।
यूरोपीय परिषद की मंजूरी के बाद समझौते के अंतिम पाठ को लागू करने के लिए यूरोपीय संसद की स्वीकृति भी आवश्यक होगी। इसके बाद भारत-ईयू व्यापार संबंधों में नई गति आने की उम्मीद है।