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भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता: मदर ऑफ ऑल डील्स

भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय सौदों में शामिल है, जिससे व्यापार, निवेश और निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और 27 यूरोपीय देशों तक भारत की पहुंच आसान होगी।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी सभी सौदों की जननी बताया जा रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में से एक है। इस ऐतिहासिक समझौते पर बातचीत शुक्रवार (23 जनवरी) को पूरी हुई और शनिवार (24 जनवरी) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दे दी।

हालांकि चीन-आसियान व्यापार समझौता भी बड़े सौदों में गिना जाता है, लेकिन आसियान 10 देशों का समूह है और यूरोपीय संघ की तरह एक कस्टम्स यूनियन नहीं है। आसियान के सदस्य देश ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम हैं। भारत का इन देशों के साथ पहले से ही वस्तुओं पर मुक्त व्यापार समझौता है।

वित्त वर्ष 2025 में भारत-EU के बीच कुल व्यापार 190 अरब डॉलर से अधिक हो गया। इस दौरान भारत ने EU को 75.85 अरब डॉलर के सामान और 30 अरब डॉलर की सेवाएं निर्यात कीं, जबकि EU ने भारत को 60.68 अरब डॉलर का सामान और 23 अरब डॉलर की सेवाएं भेजीं। इससे भारत को 2024-25 में 15.17 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष मिला।

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EU भारत के कुल निर्यात का लगभग 17% हिस्सा है, जबकि भारत EU के कुल निर्यात का करीब 9% बाजार है। 27 देशों वाला EU वैश्विक व्यापार में बड़ी भूमिका निभाता है, जो सालाना करीब 2.9 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात और 2.6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का आयात करता है।

भारत के प्रमुख निर्यातों में पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, मशीनरी, रसायन, लोहा-इस्पात, रत्न-आभूषण, फार्मा और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं। वहीं आयात में मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विमान, चिकित्सा उपकरण और कच्चे हीरे प्रमुख हैं।

निवेश के मोर्चे पर भी EU भारत का बड़ा साझेदार है। अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक EU से भारत में 117.4 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है और करीब 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में मौजूद हैं। यह समझौता आर्थिक आकार और नियामक दायरे—दोनों लिहाज से भारत का अब तक का सबसे बड़ा एफटीए माना जा रहा है।

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