भारत ने एनीमिया के खिलाफ अभियान को किया और व्यापक, जीवन-चक्र आधारित नई रणनीति लागू
भारत ने एनीमिया के खिलाफ अभियान को जीवन-चक्र आधारित बनाया है। अब रोकथाम, पोषण सुधार, डिजिटल निगरानी और नए लाभार्थियों पर ध्यान देकर बीमारी को जड़ से खत्म करने की रणनीति अपनाई गई है।
भारत ने एनीमिया (रक्ताल्पता) के खिलाफ अपनी लड़ाई को और व्यापक बना दिया है। अब इसका जोर केवल बीमारी का पता चलने पर उपचार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जीवन के हर चरण में, यहां तक कि गर्भधारण से पहले भी, इसे रोकने पर दिया जाएगा। सरकार ने एक समग्र जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसका उद्देश्य एनीमिया को जड़ से खत्म करना है।
अब तक भारत में एनीमिया के खिलाफ अभियान मुख्य रूप से आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों के वितरण, कृमिनाशक अभियानों और पोषण परामर्श तक सीमित था। लेकिन अब इस रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। 29 जून को शुरू की जाने वाली ‘एनीमिया मुक्त भारत’ (एएमबी) अभियान की संशोधित परिचालन दिशानिर्देशों में कई नए प्रावधान जोड़े गए हैं।
नई योजना के तहत अब एक नया लाभार्थी समूह शामिल किया गया है, जिसमें कम जन्म वजन वाले शिशु (0 से 6 महीने तक) भी शामिल होंगे। इसके अलावा आहार संबंधी हस्तक्षेपों पर अधिक जोर दिया जाएगा, जिसमें आयरन से भरपूर और विविध आहार का नियमित सेवन सुनिश्चित करना शामिल है।
सरकार ने इस कार्यक्रम में डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली को भी शामिल किया है, जिससे मरीजों की निगरानी और उपचार की प्रगति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति तक समय पर पोषण और उपचार पहुंच सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया दृष्टिकोण भारत में एनीमिया के बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाएगा।
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