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भारत-फ्रांस अंतरिक्ष सहयोग के नए चरण में मानव अंतरिक्ष उड़ान और स्टार्टअप पर जोर

भारत-फ्रांस अंतरिक्ष सहयोग नए चरण में पहुंचा है। मानव अंतरिक्ष उड़ान, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र पर जोर रहेगा। दोनों देश सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों का सहयोग बढ़ाएंगे।

भारत और फ्रांस के बीच अंतरिक्ष सहयोग ने नए चरण में प्रवेश किया है। इस नए दौर में मानव अंतरिक्ष उड़ान, स्टार्टअप और उभरते अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली में फ्रांस के उच्च शिक्षा, अनुसंधान एवं अंतरिक्ष मंत्री फिलिप बैप्टिस्ट के नेतृत्व में आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के दौरान यह बात कही।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच छह दशक से अधिक पुरानी अंतरिक्ष साझेदारी अब बड़े और व्यापक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का अवसर दे रही है। इसमें सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप को एक साथ जोड़कर सहयोग को नई दिशा दी जा सकती है।

गगनयान से संयुक्त उपग्रह मिशन तक सहयोग

मंत्री ने कहा कि भारत-फ्रांस अंतरिक्ष साझेदारी की शुरुआत साउंडिंग रॉकेट प्रयोगों से हुई थी और अब यह गगनयान तथा संयुक्त उपग्रह मिशनों तक पहुंच चुकी है। भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में जारी बदलावों ने दोनों देशों के लिए सरकारी संस्थानों और स्थापित अंतरिक्ष एजेंसियों से आगे सहयोग के नए रास्ते खोले हैं।

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उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ने के साथ भारत में एक व्यापक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है। वर्तमान में 400 से अधिक भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप रॉकेट निर्माण, उपग्रह निर्माण और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों समेत विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

उद्योग और स्टार्टअप सहयोग पर जोर

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग के अगले चरण में दोनों देशों के सरकारी संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप को एक साझा मंच पर लाया जा सकता है। इससे संसाधनों का व्यापक आधार तैयार होगा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नई तकनीकों तथा नवाचार को गति मिल सकती है।

उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकार-उद्योग और स्टार्टअप के बीच व्यापक सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया। मंत्री के मुताबिक, भारत और फ्रांस की दीर्घकालिक साझेदारी अब मानव अंतरिक्ष उड़ान, निजी अंतरिक्ष उद्योग और नए अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार के जरिए और व्यापक हो सकती है।

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