भारत-नेपाल सीमा पर सुस्ता में तनाव, नेपाली ग्रामीणों पर पथराव का आरोप; 150 से 200 लोगों पर एफआईआर
पश्चिमी चंपारण के सुस्ता सीमा क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। एसएसबी ने नेपाली ग्रामीणों पर पथराव और निर्माण कार्य का आरोप लगाया। पुलिस ने 200 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया।
बिहार के पश्चिमी चंपारण से सटे भारत-नेपाल सीमा के सुस्ता क्षेत्र में एक बार फिर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) ने आरोप लगाया है कि नेपाल के सुस्ता गांव के ग्रामीणों ने भारतीय सीमा की ओर मिट्टी का बांध बनाने की कोशिश की और विरोध करने पर सुरक्षाबलों पर पथराव किया।
एसएसबी की ओर से वाल्मीकिनगर थाना में दिए गए आवेदन के आधार पर 150 से 200 अज्ञात नेपाली नागरिकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
एसएसबी के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को 21वीं वाहिनी बगहा के जवान नियमित गश्त और सूचना संकलन के लिए सीमा क्षेत्र में गए थे। दोपहर करीब 2:15 बजे जवानों ने सुस्ता से सटे भारतीय क्षेत्र में कुछ नेपाली ग्रामीणों को मिट्टी का बांध बनाते देखा।
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एसएसबी का दावा है कि कुछ दिन पहले भारत और नेपाल के सुरक्षा अधिकारियों के बीच हुई बैठक में यह सहमति बनी थी कि विवादित क्षेत्र में अंतिम निर्णय होने तक यथास्थिति बनाए रखी जाएगी और कोई नया निर्माण कार्य नहीं होगा। इसके बावजूद नेपाली ग्रामीणों द्वारा बांध निर्माण शुरू करने का आरोप लगाया गया है।
एसएसबी अधिकारियों ने जब नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) के अधिकारियों से बातचीत शुरू की, तभी बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि भीड़ ने जवानों के साथ अभद्र व्यवहार किया, गाली-गलौज की और लाठी-डंडों व पत्थरों के साथ आक्रामक किया।
हालात बिगड़ने पर एसएसबी की टीम भारतीय सीमा क्षेत्र की ओर लौट आई। इसके बाद भीड़ द्वारा कथित रूप से सीमा रेखा पार कर भारतीय क्षेत्र में पहुंचकर पथराव करने की बात कही गई है।
वाल्मीकिनगर थाना प्रभारी मनोज कुमार ने बताया कि एसएसबी के आवेदन के आधार पर थाना कांड संख्या 119/26 दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की जांच जारी है।
सुस्ता विवाद भारत-नेपाल सीमा का पुराना विवादित क्षेत्र है। गंडक (नारायणी) नदी की बदलती धारा के कारण वर्षों से यहां सीमा निर्धारण को लेकर मतभेद रहे हैं। इसी वजह से दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरतती हैं।
फिलहाल इस मामले में नेपाल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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