2032 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता तीन गुना करने का लक्ष्य: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
सरकार ने 2032 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है। 2047 तक 100 गीगावाट क्षमता हासिल करने की योजना के साथ सुरक्षा और ईंधन आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया।
केंद्र सरकार ने देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्ष 2031–32 तक तीन गुना करने का लक्ष्य तय किया है। केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत अपने दीर्घकालिक ऊर्जा संक्रमण में परमाणु ऊर्जा को प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित कर रहा है।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश की स्थापित परमाणु क्षमता 4,780 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 8,780 मेगावाट हो चुकी है। इसे 2031–32 तक बढ़ाकर 22,380 मेगावाट करने का लक्ष्य है। आगे के चरणों में 2037 तक 47 गीगावाट, 2042 तक 67 गीगावाट और 2047 तक 100 गीगावाट क्षमता हासिल करने की योजना है। इस विस्तार को नीति सुधारों, निजी क्षेत्र की भागीदारी और 2035 तक परमाणु संयंत्र उपकरणों के आयात पर शुल्क छूट दिया जाएगा।
जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का भारत की चल रही परमाणु परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की तीसरी और चौथी इकाई 2026–27 तक पूरी हो जाएंगी, जबकि पांचवीं और छठी इकाई 2030 तक चालू की जाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालिया अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिवर्तनों के बावजूद लागत वृद्धि या देरी की कोई आशंका नहीं है।
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ईंधन सुरक्षा के सवाल पर मंत्री ने कहा कि भारत अब केवल बाहरी यूरेनियम आपूर्ति पर निर्भर नहीं है। 2014 के बाद से परमाणु क्षमता दोगुनी से अधिक हो चुकी है और सरकार घरेलू क्षमता सुदृढ़ करने के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ा रही है।
जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना पर भी बातचीत प्रगति पर है, जिसमें 1,600 मेगावाट के छह रिएक्टर प्रस्तावित हैं। तकनीकी ढांचा तैयार है, जबकि वाणिज्यिक मुद्दों पर संबंधित मंत्रालयों के साथ चर्चा जारी है।
सामुदायिक कल्याण के तहत न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने चालू वित्त वर्ष में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत 168 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। ये राशि बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास पर केंद्रित है।
सुरक्षा के मुद्दे पर मंत्री ने दोहराया कि भारत का परमाणु कार्यक्रम “सुरक्षा पहले, उत्पादन बाद में” के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रिएक्टर वैज्ञानिक मानकों के अनुसार अपना ईंधन चक्र स्वयं प्रबंधित करता है।
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