भारत ने बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में लिया हिस्सा, डोनाल्ड ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र विकल्प
भारत ने वॉशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में पर्यवेक्षक के रूप में हिस्सा लिया। डोनाल्ड ट्रंप ने इसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में पेश किया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक गुरुवार को वॉशिंगटन में आयोजित हुई, जिसमें भारत ने पर्यवेक्षक देश के रूप में भाग लिया। यह बैठक यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस में हुई, जहां लगभग 50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें से 27 देश औपचारिक रूप से इस बोर्ड से जुड़ चुके हैं।
वॉशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में उप मिशन प्रमुख नामग्या सी खम्पा ने नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया। इससे पहले विदेश मंत्रालय ने कहा था कि अमेरिका द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव पर भारत विचार कर रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की शुरुआत की थी। ट्रंप ने इसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में पेश किया और कहा कि इसका उद्देश्य इजराइल और हमास के बीच जारी संघर्ष में युद्धविराम कायम रखना है। उन्होंने दावा किया कि इस पहल में वैश्विक स्तर पर गहरी रुचि है और “हर कोई इसका हिस्सा बनना चाहता है।”
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शुरुआत में यह बोर्ड गाजा में इजराइल-हमास युद्धविराम की निगरानी और पुनर्निर्माण प्रयासों के लिए बनाया गया था, लेकिन अब अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इसका दायरा और व्यापक किया जा सकता है।
बैठक में अजरबैजान, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, इजराइल, जॉर्डन, मोरक्को, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे देश शामिल हुए। भारत और यूरोपीय संघ ने पर्यवेक्षक के रूप में चर्चा में हिस्सा लिया।
इस बीच ट्रंप ने चीन और रूस को भी इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। उन्होंने कहा कि कई देश बोर्ड में शामिल होने की प्रक्रिया में हैं और वे चाहते हैं कि चीन तथा रूस भी इसका हिस्सा बनें।
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