भारत-ओमान सीईपीए लागू: व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
भारत-ओमान सीईपीए लागू होने से भारतीय निर्यातकों को लगभग पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जिससे व्यापार, निवेश, सेवाएं और रणनीतिक सहयोग में बड़ी वृद्धि की उम्मीद है।
भारत और ओमान सल्तनत के बीच हुआ कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीईपीए) 1 जून से लागू हो गया है। यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इसके लागू होने से भारतीय निर्यातकों को ओमान के बाजार में लगभग पूरी तरह से शुल्क-मुक्त पहुंच मिल गई है।
यह भारत का 2014 के बाद लागू होने वाला पांचवां बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है, इससे पहले भारत ने मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के साथ ऐसे समझौते किए हैं।
सीईपीए एक व्यापक व्यापार समझौता होता है, जो केवल वस्तुओं पर टैरिफ कम करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसमें सेवाएं, निवेश, बौद्धिक संपदा, सीमा शुल्क सहयोग और पेशेवरों की आवाजाही जैसे कई क्षेत्र शामिल होते हैं।
भारत और ओमान के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 11.18 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत का निर्यात 4.02 अरब डॉलर और आयात 7.16 अरब डॉलर रहा। सेवाओं के क्षेत्र में भी तेजी देखी गई है, खासकर आईटी, दूरसंचार और परिवहन सेवाओं में।
इस समझौते के तहत ओमान ने भारत को 98.08% टैरिफ लाइनों पर 100% शुल्क-मुक्त पहुंच दी है, जो भारत के लगभग 99.38% निर्यात मूल्य को कवर करता है। इससे कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, कृषि उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, मशीनरी, ऑटोमोबाइल और आभूषण जैसे क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा।
ओमान की रणनीतिक स्थिति भी इस समझौते को और महत्वपूर्ण बनाती है। यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित है, जो वैश्विक तेल व्यापार का अहम मार्ग है। इससे भारत की मध्य पूर्व और अफ्रीका में व्यापारिक पहुंच और मजबूत होगी।
ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय रहते हैं और वहां 6000 से अधिक भारतीय कंपनियां कार्यरत हैं। यह समझौता भारत की “एक्ट ईस्ट और ग्लोबल ट्रेड” नीति को और मजबूती देता है।