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भारत–ओमान सीईपीए: व्यापार, सेवाओं, निवेश और रोजगार के लिए क्या बदलेगा नया समझौता

भारत–ओमान सीईपीए से व्यापार, सेवाओं और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच, पेशेवरों की आवाजाही और नियामकीय सहयोग से रोजगार और आर्थिक एकीकरण मजबूत होगा।

भारत और ओमान ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट – CEPA) पर हस्ताक्षर कर अपने आर्थिक संबंधों को नई दिशा दी है। यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर आवाजाही और नियामकीय सहयोग के लिए एकीकृत ढांचा प्रदान करता है। यह केवल शुल्क कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक एकीकरण, अनुमानित बाजार पहुंच और कारोबार को सुगम बनाने की व्यवस्था भी करता है।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत–ओमान द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024–25 में दोनों देशों के बीच व्यापार 10.61 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष 8.94 अरब डॉलर था। सेवाओं के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जहां भारत का निर्यात 2020 में 397 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2023 में 617 मिलियन डॉलर हो गया।

सीईपीए के तहत भारत को ओमान में 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शत-प्रतिशत शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच मिलेगी, जो भारत के कुल निर्यात मूल्य का 99.38 प्रतिशत कवर करती है। यह लाभ समझौते के लागू होते ही प्रभावी होगा। खनिज, रसायन, मशीनरी, प्लास्टिक, वस्त्र, कृषि और समुद्री उत्पाद, तथा रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों को इससे सीधा फायदा मिलेगा। 28 अरब डॉलर से अधिक के ओमान आयात बाजार में भारत के लिए बड़े अवसर खुलेंगे।

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भारत ने भी ओमान से आयात पर 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में रियायत दी है, लेकिन डेयरी, अनाज, मसाले, पेट्रोलियम उत्पाद, रबर, वस्त्र, चमड़ा और कुछ कृषि वस्तुओं जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण सूची में रखा गया है। इसका उद्देश्य एमएसएमई, किसानों और श्रम-प्रधान उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सेवाओं के क्षेत्र में भी सीईपीए महत्वपूर्ण है। 127 उप-क्षेत्रों में ओमान ने उदार प्रतिबद्धताएं की हैं, जिनमें आईटी, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और अनुसंधान शामिल हैं। पेशेवरों की आवाजाही के लिए इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरी की सीमा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है।

समझौते में तकनीकी बाधाओं, स्वच्छता और मानक उपायों पर सहयोग को भी शामिल किया गया है, जिससे गैर-शुल्क बाधाएं कम होंगी। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र, रत्न एवं आभूषण और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्रों में रोजगार सृजन की उम्मीद है। कुल मिलाकर, भारत–ओमान सीईपीए को संतुलित और रणनीतिक समझौता माना जा रहा है, जो दीर्घकाल में व्यापार, निवेश और रोजगार को मजबूती देगा।

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