शेख हसीना की वापसी की समयसीमा कोई नहीं बता सकता, भारत ने प्रत्यर्पण पर दिया बड़ा बयान
भारत ने कहा है कि शेख हसीना के बांग्लादेश प्रत्यर्पण की कोई समयसीमा तय नहीं है। उनका अनुरोध कानूनी प्रक्रिया में है और दोनों देशों के संबंधों पर इसका असर पड़ा है।
भारत ने पूर्व बांग्लादेश प्रधानमंत्री शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी को लेकर कोई समयसीमा बताने से इनकार किया है। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर एक तय और व्यवस्थित कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है।
ढाका में एक निजी थिंक टैंक के कार्यक्रम में सवालों का जवाब देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि हसीना की वापसी के लिए कोई समयसीमा नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि भारत सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि प्रत्यर्पण अनुरोध एक स्थापित, कानूनी और सुव्यवस्थित प्रक्रिया के तहत देखा जा रहा है।
त्रिवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि हसीना को भारतीय वायुसेना या भारतीय सेना भारत नहीं लाई थी। 79 वर्षीय शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में अपनी सरकार गिरने के बाद भारत आई थीं। उस समय बांग्लादेश में सरकार विरोधी आंदोलन तेज हो गया था।
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भारतीय उच्चायुक्त के अनुसार, हसीना जब भारत पहुंची थीं, तब वह बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं और बिगड़ते हालात के बीच बांग्लादेश वायुसेना के एक विमान से भारत आई थीं। त्रिवेदी ने कहा कि उस समय परिस्थितियां ऐसी थीं कि भारत के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे और पड़ोसी होने के नाते भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाया।
हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव का प्रमुख कारण बना हुआ है। 8 अगस्त 2024 को मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कई मुद्दों को लेकर मतभेद बढ़े।
2025 में विशेष न्यायाधिकरण ने हसीना की अनुपस्थिति में सुनवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। अंतरिम सरकार ने उनकी अवामी लीग पार्टी पर भी प्रतिबंध लगाया और भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की।
बाद में बांग्लादेश की नई सरकार ने भी प्रत्यर्पण की मांग जारी रखी। हसीना ने नई दिल्ली से अगस्त में एक ऑनलाइन संवाद के दौरान दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का संकल्प जताया था। हालांकि, भारत ने अब तक उनकी वापसी की कोई समयसीमा नहीं बताई है।
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