भारत ने परमाणु हथियार मुक्त विश्व के संकल्प को दोहराया
भारत ने परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। सिबी जॉर्ज ने नस्लवाद विरोधी प्रयासों, डरबन घोषणा के क्रियान्वयन और सांस्कृतिक विरासत वापसी पर सहयोग बढ़ाने की मांग की।
भारत ने परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व और सभी परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। भारत ने कहा कि सार्वभौमिक, गैर-भेदभावपूर्ण और सत्यापन योग्य निरस्त्रीकरण के जरिए इस लक्ष्य को हासिल किया जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की एक उच्चस्तरीय बैठक में भारत का वक्तव्य दिया। यह बैठक परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर आयोजित की गई थी।
भारत ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में अंतरराष्ट्रीय प्रयास सार्वभौमिक और गैर-भेदभावपूर्ण होने चाहिए। साथ ही, निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया प्रभावी और सत्यापन योग्य तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
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नस्लवाद और भेदभाव के खिलाफ प्रतिबद्धता
विदेश मंत्रालय के अनुसार, सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में डरबन घोषणा और कार्ययोजना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित बैठक में भी भारत का पक्ष रखा।
उन्होंने नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, विदेशियों के प्रति भय और संबंधित असहिष्णुता के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने डरबन घोषणा और कार्ययोजना को लागू करने के लिए ठोस प्रयासों का आह्वान किया।
भारत ने कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयास जरूरी हैं। सिबी जॉर्ज ने घोषणा के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सांस्कृतिक विरासत की वापसी पर जोर
संयुक्त राष्ट्र में एक अन्य कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सांस्कृतिक संपत्तियों और विरासत को उनके मूल देशों में वापस पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की आवश्यकता भी रेखांकित की। भारत ने सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और उसके मूल स्थानों पर वापसी के लिए सहयोग बढ़ाने का समर्थन किया।
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