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भारत ने प्रशांत द्वीप देशों के साथ गहरी साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत ने प्रशांत द्वीप देशों के साथ साझेदारी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु लचीलापन, डिजिटल तकनीक, आपदा प्रबंधन और एआई सहयोग को प्राथमिकता दी गई।

भारत ने मंगलवार को प्रशांत द्वीप देशों के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने पलाऊ के कोरोर में आयोजित 55वीं प्रशांत द्वीप समूह फोरम नेताओं की बैठक के संवाद सत्र को संबोधित करते हुए भारत की प्राथमिकताओं को सामने रखा।

मार्गेरिटा ने कहा कि भारत ‘ब्लू पैसिफिक महाद्वीप’ के साथ साझेदारी को सर्वोच्च महत्व देता है। उन्होंने बताया कि प्रशांत क्षेत्र के साथ भारत का जुड़ाव एक्ट ईस्ट नीति, द्विपक्षीय संबंधों, भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच और प्रशांत द्वीप समूह फोरम के माध्यम से लगातार मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत प्रशांत क्षेत्र को कोई दूरस्थ इलाका नहीं, बल्कि साझा हिंद-प्रशांत का अभिन्न हिस्सा मानता है। भारत का हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध क्षेत्र पर आधारित है। इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, नौवहन की स्वतंत्रता, वैध व्यापार और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का सम्मान शामिल है।

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मार्गेरिटा ने कहा कि भारत ने 2019 में हिंद-प्रशांत महासागर पहल शुरू की थी। इसका उद्देश्य खुले और स्वतंत्र समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ महासागरों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखना है।

विकास सहयोग के तहत भारत स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल क्षमता निर्माण, जल और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में प्रशांत देशों की मदद कर रहा है। ये परियोजनाएं द्विपक्षीय विकास सहयोग तथा भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के माध्यम से लागू की जा रही हैं।

जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते जलस्तर को प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए मार्गेरिटा ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन जैसी पहलों में भागीदारी का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत आपदा की पूर्व चेतावनी, आपदा तैयारी, मजबूत बुनियादी ढांचे और समय पर मानवीय सहायता के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपदा राहत सहयोग मजबूत कर रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता की संभावनाओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, जलवायु लचीलापन और सार्वजनिक सेवाओं में प्रशांत देशों की विकास संबंधी चुनौतियों का समाधान करने में मदद कर सकता है।

भारत सभी 14 प्रशांत द्वीपीय देशों में मांग आधारित त्वरित प्रभाव वाली परियोजनाएं लागू कर रहा है। वर्ष 2024 में टोंगा में आयोजित प्रशांत द्वीप समूह फोरम शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने प्रत्येक प्रशांत द्वीपीय देश में एक ऐसी परियोजना के लिए समर्थन की घोषणा की थी।

मार्गेरिटा ने कहा कि इन परियोजनाओं पर काम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है और उनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने प्रशांत साझेदारों और प्रशांत द्वीप समूह फोरम की प्राथमिकताओं को सुनकर उनके अनुरूप सहयोग जारी रखेगा।

उन्होंने कहा कि भारत एक मजबूत, अधिक लचीले और समृद्ध ‘ब्लू पैसिफिक महाद्वीप’ के निर्माण के लिए प्रशांत देशों के साथ लगातार काम करता रहेगा। 55वीं प्रशांत द्वीप समूह फोरम नेताओं की बैठक में प्रशांत द्वीपीय देशों के नेताओं और संवाद साझेदारों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

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