भारत ने सिंधु जल संधि पर रुख दोहराया, पीओके में अत्याचार और सीमा पार आतंकवाद पर जताई चिंता
भारत ने सिंधु जल संधि पर अपने रुख में बदलाव से इनकार किया और पीओके में कथित अत्याचारों पर चिंता जताई। रूस, इटली तथा बांग्लादेश संबंधों पर भी जानकारी दी।
भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपने रुख में किसी भी बदलाव से इनकार करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की जल बंटवारे संबंधी चेतावनी को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि संधि पर भारत की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। साथ ही, मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को लेकर नॉर्वे और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में किए गए संदर्भ पर भी कड़ी आपत्ति जताई।
नई दिल्ली में मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सिंधु जल संधि को लेकर भारत के रुख में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। पाकिस्तान ने हाल में जल आपूर्ति को अपनी “लाल रेखा” बताते हुए भारत से संधि को बहाल करने की मांग की थी और चेतावनी दी थी कि ऐसा नहीं होने पर इस्लामाबाद सीधी प्रतिक्रिया देगा।
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद 1960 की सिंधु जल संधि को स्थगित रखा था। इस हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। भारत का कहना है कि संधि व्यवस्था को दोबारा सक्रिय करने का संबंध पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय और प्रभावी कार्रवाई से है।
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पीओके को लेकर भारत का कड़ा रुख
नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार की इस्लामाबाद में हुई बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए जायसवाल ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अवैध रूप से कब्जे वाले पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कथित अत्याचारों और वहां से होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर ध्यान देना चाहिए।
पीओके में बिजली की कीमतों और आवश्यक वस्तुओं को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच राजनीतिक सुधार, जवाबदेही और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मांग भी उठ रही है।
रूस के साथ उत्तरी समुद्री मार्ग पर चर्चा
भारत और रूस के बीच उत्तरी समुद्री मार्ग के जरिए संपर्क बढ़ाने को लेकर बातचीत जारी है। यह मार्ग रूस के उत्तरी तट के साथ आर्कटिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और यूरोप तथा एशिया के बीच पारंपरिक स्वेज नहर मार्ग की तुलना में छोटा समुद्री रास्ता उपलब्ध करा सकता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि संपर्क व्यवस्था भारत-रूस बहुआयामी सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह सहयोग अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारे जैसी पहलों को भी मजबूती दे सकता है।
इटली के साथ मजबूत संबंध
कांग्रेस नेताओं और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की भारत-इटली संबंधों पर टिप्पणियों के बीच विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों के मजबूत रिश्तों पर जोर दिया। जायसवाल ने कहा कि भारत और इटली के संबंध हाल के वर्षों में लगातार व्यापक और मजबूत हुए हैं तथा दोनों देशों को आपसी सम्मान और समझ के साथ संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए।
बांग्लादेश की अतिरिक्त डीजल मांग पर विचार
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा डीजल आपूर्ति व्यवस्था जारी रहेगी। हालांकि, अतिरिक्त डीजल की ढाका की मांग पर भारत अपनी घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और उपलब्धता को ध्यान में रखकर निर्णय करेगा। दोनों देशों के बीच भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से पहले से डीजल की आपूर्ति की जा रही है।
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