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कृषि-खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को लेकर भारत की वैश्विक पहल

भारत ने IRENA संवाद में कृषि-खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण पर जोर देते हुए पीएम-कुसुम और आगामी पीएम-कुसुम 2.0 के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत ने कृषि और खाद्य प्रणालियों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोहराया है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने अबू धाबी में अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा आयोजित अंतर-मंत्रालयी उच्चस्तरीय संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए समग्र दृष्टिकोण अपना रहा है।

मंत्री जोशी ने कहा कि भारत की रणनीति उच्च महत्वाकांक्षा के साथ मजबूत क्रियान्वयन पर आधारित है, जिसमें विकेंद्रीकृत कार्रवाई, समावेशी डिजाइन और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय प्रमुख भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) को भारत की प्रमुख पहल के रूप में रेखांकित किया, जिसके तहत अब तक लगभग 10 लाख स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाए जा चुके हैं और 11 लाख से अधिक ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण किया गया है।

इस योजना से 10,200 मेगावाट से अधिक स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जुड़ी है, जिससे डीजल आधारित सिंचाई पर निर्भरता कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप किसानों की सिंचाई लागत स्थिर हुई है और ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। मंत्री ने कहा कि भारतीय किसान अब केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के प्रदाता भी बन रहे हैं।

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जोशी ने यह भी घोषणा की कि सरकार पीएम-कुसुम 2.0 को शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिसमें विकेंद्रीकृत सौर समाधान और एग्री-फोटोवोल्टिक प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन प्रणालियों के माध्यम से एक ही भूमि पर खेती और सौर ऊर्जा उत्पादन को साथ-साथ संभव बनाया जा सकेगा।

IRENA महासभा के दौरान मंत्री जोशी ने कई द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इनमें आइसलैंड के अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग महानिदेशक के साथ भू-तापीय ऊर्जा में तकनीकी सहयोग, यूरोपीय संघ के ऊर्जा महानिदेशक के साथ भारत–ईयू स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी की समीक्षा, तथा संयुक्त अरब अमीरात के निवेश मंत्री के साथ पश्चिम एशिया में नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ बुनियादी ढांचे में निवेश को आगे बढ़ाने पर चर्चा शामिल रही।

भारत ने कहा कि प्रचुर धूप और लाखों छोटे जोत वाले किसानों की मौजूदगी के चलते वह नवीकरणीय ऊर्जा आधारित कृषि परिवर्तन में वैश्विक नेतृत्व निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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