जून में भारत का रूसी तेल आयात 39% बढ़ा, अमेरिका से सप्लाई घटी; शीर्ष आपूर्तिकर्ताओं की सूची जारी
जून में भारत का रूसी तेल आयात 39% बढ़ा, जबकि अमेरिका से आयात घटा। UAE, सऊदी और वेनेजुएला प्रमुख आपूर्तिकर्ता बने रहे, ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में बदलाव दिखा।
भारत ने जून महीने में रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात में 39% की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है, जबकि इसी अवधि में अमेरिका से आने वाली आपूर्ति में तेज गिरावट देखने को मिली है। यह आंकड़े वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलते हालात और भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को दर्शाते हैं।
मैरिटाइम और कमोडिटी इंटेलिजेंस फर्म केप्लर (Kpler) के अनुसार, 1 जून से 19 जून के बीच भारत ने रूस से औसतन 2.66 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) कच्चा तेल आयात किया। यह मई के 1.91 मिलियन bpd के मुकाबले काफी अधिक है। इसके साथ ही रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात लगभग 636,000 bpd रहा, जो मई के रिकॉर्ड स्तर 644,000 bpd के करीब ही है। सऊदी अरब ने 384,000 bpd की आपूर्ति की, जबकि वेनेजुएला 209,000 bpd के साथ चौथे स्थान पर रहा। दूसरी ओर, अमेरिका से आयात घटकर मात्र 91,000 bpd रह गया, जो मई के 252,000 bpd से काफी कम है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने यह कदम ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने और वैश्विक आपूर्ति जोखिमों, खासकर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में तनाव के बीच स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल मिलने के कारण उसकी हिस्सेदारी लगातार मजबूत हो रही है। वहीं, यूएई और अन्य खाड़ी देशों से बढ़ी खरीद ने सप्लाई चेन को संतुलित रखने में मदद की है।
भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक है, अपनी जरूरतों के लिए भारी मात्रा में विदेशों पर निर्भर है। हालिया भू-राजनीतिक तनावों के चलते ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले महीनों में भारत अपनी तेल आयात नीति में और अधिक विविधता लाने की कोशिश कर सकता है।