भारत ने श्रीलंका को भेजे 10 और बेली ब्रिज, चक्रवात दित्वाह से प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाली को मिली गति
भारत ने चक्रवात दित्वाह से प्रभावित श्रीलंका में संपर्क बहाली के लिए 10 और बेली ब्रिज भेजे, जिससे यातायात, आपूर्ति और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
भारत ने चक्रवात दित्वाह से गंभीर रूप से प्रभावित श्रीलंका के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण संपर्क व्यवस्था को बहाल करने के लिए 10 और बेली ब्रिज भेजे हैं। शनिवार को विशाखापत्तनम से भारतीय नौसेना के पोत आईएनएस घरियाल के माध्यम से यह पुलों की खेप कोलंबो के लिए रवाना की गई।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत चक्रवात दित्वाह के बाद पुनर्निर्माण प्रयासों में श्रीलंका के साथ मजबूती से खड़ा है। मंत्रालय के अनुसार, इन बेली ब्रिजों की आपूर्ति से प्रभावित इलाकों में टूटे सड़क संपर्क को दोबारा जोड़ने में मदद मिलेगी, जिससे आम लोगों को राहत पहुंचेगी।
मंत्रालय ने बताया कि यह सहायता भारत द्वारा घोषित 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज का हिस्सा है, जिसकी घोषणा हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की श्रीलंका यात्रा के दौरान की गई थी। इससे पहले भारत ने ऑपरेशन सागरबंधु के तहत आपातकालीन मानवीय सहायता और आपदा राहत सहयोग भी प्रदान किया था।
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पिछले सप्ताह बी-492 कैंडी–रागला रोड पर 120 फुट लंबे बेली ब्रिज का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया गया। इस पुल के शुरू होने से एक महत्वपूर्ण सड़क संपर्क फिर से बहाल हुआ, जिससे स्थानीय समुदायों की आवाजाही आसान हुई। यह पुल यात्रियों के आवागमन, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के पुनरुद्धार के लिए अहम साबित हो रहा है।
कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने बताया कि कैंडी–रागला मार्ग पर यह दूसरा बेली ब्रिज है, जो भारत की 450 मिलियन डॉलर की पुनर्निर्माण और पुनर्वास सहायता के तहत बनाया गया है। इससे पहले 10 जनवरी 2026 को केएम-21 पर 100 फुट लंबे बेली ब्रिज का उद्घाटन किया गया था।
चक्रवात दित्वाह के कारण भूस्खलन और पुराने पुलों के ढहने से पहाड़ी क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई थी। नए बेली ब्रिजों के चालू होने से इन इलाकों में पहुंच और आवागमन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आने वाले चरणों में और भी बेली ब्रिज बनाए जाएंगे, ताकि सभी प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क पूरी तरह से बहाल किया जा सके।
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