नेपाल में तबाही के बीच भारत का बड़ा राहत अभियान, 11 टन और मदद भेजी
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से तबाही के बीच भारत ने 11 टन अतिरिक्त राहत सामग्री भेजी है। आपदा में 1,410 मौतें हुईं, हजारों लोग लापता हैं।
नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से मची भारी तबाही के बीच भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। भारत ने 11 टन अतिरिक्त मानवीय राहत सामग्री नेपाल भेजी है। इसमें जरूरी दवाइयां, फॉरेंसिक सामग्री, तंबू, स्वच्छता किट, स्लीपिंग बैग और अन्य आवश्यक सामान शामिल हैं।
नेपाल में आपदा के बाद बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान जारी है। लगातार बढ़ते राहत प्रयासों के बीच भारत की ताजा सहायता को नेपाल में चल रहे मानवीय अभियान के लिए महत्वपूर्ण सहयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
नेपाल में 1,410 लोगों की मौत, 6 हजार से ज्यादा लापता
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के 18 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 1,410 हो गई है। इनमें 525 बरामद मानव अवशेष भी शामिल हैं।
और पढ़ें: नेपाल की बाढ़ का असर जारी, गंडक बराज के फाटक से मिला एक और शव; अब तक 15 बरामद
सबसे ज्यादा मौतें चितवन में दर्ज की गई हैं, जहां 364 लोगों की जान गई। पूर्वी नवलपरासी में 232, पश्चिमी नवलपरासी में 222, नुवाकोट में 202 और रसुवा में 199 लोगों की मौत हुई है।
प्राधिकरण के मुताबिक, 6,055 लोग अब भी लापता हैं, जबकि 13,756 लोगों को बचाया जा चुका है। छह अस्पतालों में 18 लोगों का उपचार चल रहा है। सुरक्षा बलों ने करीब 9,984 लोगों को चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई है।
20 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत अभियान में
नेपाल ने राहत और बचाव अभियान को तेज करने के लिए सुरक्षा बलों के 20,929 जवानों को तैनात किया है। दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।
नेपाल सेना अब तक 1,651 हेलीकॉप्टर उड़ानें संचालित कर चुकी है। इनमें 18 सितंबर को हुई 17 उड़ानें भी शामिल हैं। वहीं, सशस्त्र पुलिस बल ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए 320 उड़ानें संचालित की हैं।
अगस्त से लगातार नेपाल की मदद कर रहा भारत
भारत की ताजा राहत खेप नेपाल के लिए भेजी गई सहायता की लंबी श्रृंखला का हिस्सा है। भारत ने 26 अगस्त को अपना राहत अभियान शुरू किया था। पहली उड़ान में 10 टन राहत सामग्री भेजी गई थी, जिसमें अस्थायी आश्रय, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप और दवाइयां शामिल थीं।
27 अगस्त को दूसरी उड़ान से 37.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी गई। इसमें तंबू, कंबल, स्वच्छता किट, सौर लैंप, पानी निकालने वाले पंप, रसोई सेट, जनरेटर, दवाइयां और खाद्य सामग्री शामिल थी।
30 अगस्त को भारत ने 11 टन राहत सामग्री के साथ तकनीकी बचाव दल और डीएनए विश्लेषण के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी नेपाल भेजे।
2 सितंबर को एक विमान से 11 सदस्यीय बचाव दल, विशेष उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां भेजी गईं। इसके बाद 4 सितंबर को दो सी-130जे विमानों के जरिए कुल 21.5 टन मानवीय सहायता काठमांडू पहुंची।
चिलिमे सुरंग में भी भारतीय दल कर रहा मदद
भारत की राहत टीम नेपाल सेना के साथ रसुवा की चिलिमे सुरंग में खोज और बचाव अभियान में भी सहयोग कर रही है। 9 सितंबर को भारत की आठवीं राहत उड़ान 35 टन राहत एवं बचाव सामग्री लेकर काठमांडू पहुंची थी। इसमें सुरंग बचाव उपकरण और फॉरेंसिक सामग्री शामिल थी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत नेपाल की पुनर्बहाली में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ताजा सहायता को सरकार की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत जारी मानवीय सहयोग का हिस्सा बताया।
विस्थापितों के लिए 23 अस्थायी केंद्र
नेपाल में प्रभावित इलाकों तक सड़क और हवाई मार्ग से खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। राहत अभियान में सरकारी एजेंसियों के साथ गैर-सरकारी संगठन, निजी संस्थाएं, विकास भागीदार और नागरिक समाज समूह भी जुटे हैं।
एनडीआरआरएमए के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में 502 गैस सिलेंडर भेजे जा चुके हैं। विस्थापित लोगों के लिए 23 अस्थायी केंद्र बनाए गए हैं। इनमें नुवाकोट में 611, रसुवा में 231 और धादिंग में 121 लोग रह रहे हैं।
नेपाल में राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है। भारत की नई सहायता ऐसे समय पहुंची है जब प्रभावित समुदायों तक चिकित्सा सुविधाएं, जरूरी सामान और राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश और मृतकों की पहचान का काम भी तेजी से चल रहा है।
और पढ़ें: नेपाल में भीषण बाढ़ में मारे गए लोगों के सम्मान में राष्ट्रीय शोक, 1,340 से ज्यादा लोगों की मौत