समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा भारत, सिंगापुर स्थित जहाज सुरक्षा एजेंसी से सहयोग बढ़ाने की तैयारी
भारत एशिया में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ReCAAP के सिंगापुर स्थित सूचना साझाकरण केंद्र के साथ सहयोग बढ़ाने और भारतीय एमआरसीसी के माध्यम से समन्वय गहरा करने की तैयारी में है।
भारत एशिया क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सिंगापुर स्थित एक प्रमुख जहाज सुरक्षा एजेंसी के साथ अपने सहयोग को गहरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एशिया में समुद्री डकैती और जहाजों के खिलाफ सशस्त्र लूट से निपटने के लिए गठित क्षेत्रीय सहयोग समझौते (ReCAAP) के सूचना साझाकरण केंद्र (आईएससी) के कार्यकारी निदेशक विजय डी चाफेकर ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि भारत, जो ReCAAP का संस्थापक सदस्य है, इस संगठन के सिंगापुर स्थित सूचना साझाकरण केंद्र के साथ अपने जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। चाफेकर के अनुसार, भारत और ReCAAP के बीच सहयोग का मुख्य उद्देश्य एशियाई समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षित और संरक्षित समुद्र को बढ़ावा देना है।
विजय डी चाफेकर ने बताया कि भारत की ओर से ReCAAP के भारतीय फोकल प्वाइंट, मैरीटाइम रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर (MRCC) के साथ और निकट सहयोग की उम्मीद की जा रही है। यह सहयोग समुद्री घटनाओं की त्वरित जानकारी साझा करने, आपात स्थितियों में समन्वय बढ़ाने और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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ReCAAP एक 21 देशों का अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना एशिया क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने और जहाजों के खिलाफ होने वाली डकैती तथा सशस्त्र लूट की घटनाओं को रोकने के लिए की गई थी। यह संगठन सदस्य देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान, विश्लेषण और सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे समुद्री खतरों का समय रहते पता लगाया जा सके।
भारत की भागीदारी इस संगठन में विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और उसकी बढ़ती समुद्री गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सिंगापुर स्थित सूचना साझाकरण केंद्र के साथ गहरा सहयोग भारत को न केवल क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने में मदद करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगा।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री यातायात लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही सुरक्षा चुनौतियां भी उभर रही हैं। भारत का यह कदम क्षेत्रीय सहयोग, विश्वास निर्माण और साझा सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
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