आत्मनिर्णय के अधिकार का दुरुपयोग अलगाववाद बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को घेरा
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आत्मनिर्णय के अधिकार का दुरुपयोग अलगाववाद के लिए नहीं होना चाहिए और कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि आत्मनिर्णय के अधिकार का दुरुपयोग बहुलवादी और लोकतांत्रिक देशों में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों का लगातार दुरुपयोग कर अपने “विभाजनकारी एजेंडे” को आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर एल्डोस मैथ्यू पुन्नूस ने गुरुवार (15 जनवरी, 2026) को महासभा में ‘संगठन के कार्यों पर महासचिव की रिपोर्ट’ विषय पर राष्ट्रीय वक्तव्य देते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इस मंच पर भी जम्मू-कश्मीर का अनावश्यक उल्लेख किया, जबकि यह भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है।
पुन्नूस ने कहा कि आत्मनिर्णय का अधिकार संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित एक मौलिक सिद्धांत है, लेकिन इसका दुरुपयोग किसी भी लोकतांत्रिक और बहुलवादी देश में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को निराधार आरोप लगाने और वास्तविकता से पूरी तरह कटे हुए झूठे चित्र प्रस्तुत करने से बचना चाहिए।
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भारत की यह सख्त प्रतिक्रिया पाकिस्तान के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजदूत असीम इफ्तिखार अहमद द्वारा महासभा में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद आई। भारत ने दोहराया कि पाकिस्तान बार-बार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता है, लेकिन उसे वैश्विक समुदाय से कोई समर्थन नहीं मिल पाता।
अपने वक्तव्य में पुन्नूस ने ग्लोबल साउथ की विकास संबंधी चुनौतियों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास वित्तपोषण, जलवायु न्याय और वित्त जैसे मुद्दों पर ग्लोबल साउथ को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और भारत ने इन्हें संयुक्त राष्ट्र के सभी मंचों पर प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि अब इन भावनाओं को ठोस और व्यावहारिक कदमों में बदलने की आवश्यकता है।
भारत ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है और वैश्विक नागरिक समुदाय उससे शांति और सुरक्षा, विकास तथा मानवाधिकार—इन तीनों स्तंभों पर प्रभावी परिणाम देने की अपेक्षा करता है। पुन्नूस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में संयुक्त राष्ट्र की विफलता उसकी प्रभावशीलता, वैधता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।
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