भारत-स्लोवाकिया संबंधों को मिली नई ऊंचाई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यापक साझेदारी की घोषणा की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रॉबर्ट फित्सो ने भारत-स्लोवाकिया संबंधों को व्यापक साझेदारी में बदलने की घोषणा की। स्लोवाकिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भारत और स्लोवाकिया के संबंधों को नई ऊंचाई देते हुए दोनों देशों के बीच रिश्तों को “व्यापक साझेदारी” (कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप) के स्तर तक बढ़ाने की घोषणा की। यह स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे दोनों देशों के संबंधों में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
ब्रातिस्लावा कैसल में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता और द्विपक्षीय बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्लोवाकिया के बीच विश्वास, साझा प्राथमिकताओं और भविष्य की समान सोच के आधार पर यह साझेदारी और मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री मोदी को ब्रातिस्लावा पहुंचने पर औपचारिक स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। दोनों नेताओं ने एक कला प्रदर्शनी का भी दौरा किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज और अतिरिक्त सचिव पूजा कपूर शामिल थे।
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने रॉबर्ट फित्सो को भारत का सच्चा मित्र और अनुभवी नेता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने ऑटोमोबाइल, रेलवे, उन्नत विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों देशों की साझेदारी को नई गति देगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और स्लोवाकिया के सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद और वहां रहने वाला भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रहे हैं।
वहीं, प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो ने भारत की तेज आर्थिक प्रगति, डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन भी किया।