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भारत ने फलस्तीन की संयुक्त राष्ट्र सदस्यता का किया समर्थन, दो-राष्ट्र समाधान पर दोहराया रुख

भारत ने फलस्तीन की पूर्ण संयुक्त राष्ट्र सदस्यता की मांग का समर्थन किया और इजरायल-फलस्तीन विवाद के समाधान के लिए दो-राष्ट्र नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत ने फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र की पूर्ण सदस्यता दिए जाने की मांग का समर्थन किया है। साथ ही नई दिल्ली ने इजरायल और फलस्तीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद के समाधान के लिए दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

भारत का यह रुख विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने ब्रुसेल्स में आयोजित फलस्तीन दाता समूह (पैलेस्टाइन डोनर ग्रुप) की मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान रखा। इस उच्चस्तरीय बैठक में यूरोपीय संघ, उसके सदस्य देशों, फलस्तीन, अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य फलस्तीनी प्राधिकरण के लिए आर्थिक सहायता, मानवीय मदद की व्यवस्था और फलस्तीनी लोगों के लिए राहत कार्यों पर चर्चा करना था।

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भारत लंबे समय से फलस्तीन के लिए दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता रहा है। वर्ष 1988 में भारत ने औपचारिक रूप से फलस्तीन को मान्यता दी थी। भारत की नीति रही है कि एक स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फलस्तीनी राष्ट्र का निर्माण हो, जो इजरायल के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रह सके।

फलस्तीन दाता समूह (पीडीजी) विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों का एक मंच है, जो फलस्तीनी प्राधिकरण को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और सहयोग के समन्वय का काम करता है। इसकी पहली बैठक नवंबर 2025 में हुई थी, जबकि ब्रुसेल्स में आयोजित बैठक इसका दूसरा सत्र था।

बैठक में फलस्तीनी प्राधिकरण की आर्थिक स्थिति, सुधारों की प्रगति और गाजा के लिए वित्तीय सहायता को व्यवस्थित करने की नई पहल पर चर्चा की गई। इस बैठक की सह-अध्यक्षता यूरोपीय आयुक्त हदजा लहबीब और फलस्तीन के प्रधानमंत्री मोहम्मद मुस्तफा ने की।

मई 2024 में भी भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में फलस्तीन की पूर्ण सदस्यता के समर्थन में मतदान किया था। उस प्रस्ताव के पक्ष में 143 देशों ने वोट दिया था, जबकि 9 देशों ने विरोध किया और 25 देश मतदान से दूर रहे थे।

भारत इजरायल-गाजा संघर्ष के दौरान लगातार युद्धविराम, मानवीय सहायता पहुंचाने और फलस्तीनी लोगों को मदद देने की मांग करता रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि वह केवल कूटनीतिक समर्थन ही नहीं बल्कि फलस्तीन के विकास और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में भी भागीदार है।

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