भारत को मिलेंगी पांच और एस-400 सुदर्शन स्क्वाड्रन, रूस ने 50 हजार करोड़ रुपये के सौदे के लिए दिया प्रस्ताव
भारत ने पांच अतिरिक्त एस-400 वायु रक्षा स्क्वाड्रन के लिए रूस से प्रस्ताव प्राप्त किया है। 50 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे से देश की सुरक्षा मजबूत होगी।
भारत की वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। रूस ने भारतीय वायुसेना के लिए पांच अतिरिक्त एस-400 ‘सुदर्शन’ लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों की खरीद के लिए भारत के रक्षा मंत्रालय के टेंडर के जवाब में विस्तृत प्रस्ताव सौंप दिया है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर फिलहाल प्रक्रिया चल रही है और परियोजना की अनुमानित लागत 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
एस-400 प्रणाली ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की वायु रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली ने पाकिस्तानी निगरानी और लड़ाकू विमानों को निशाना बनाने में अहम योगदान दिया और उसकी लंबी दूरी की मारक क्षमता के कारण दुश्मन के विमानों पर सीमा के करीब आने को लेकर दबाव बना रहा।
भारत के पास पहले से चार एस-400 स्क्वाड्रन
भारत ने 2018 में रूस के साथ हुए समझौते के तहत पांच एस-400 स्क्वाड्रन का ऑर्डर दिया था। इनमें से चार स्क्वाड्रन भारत को मिल चुके हैं, जबकि पांचवीं और अंतिम स्क्वाड्रन की आपूर्ति इस वर्ष नवंबर तक होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित नए समझौते के तहत पांच अतिरिक्त एस-400 स्क्वाड्रन की डिलीवरी समझौते पर हस्ताक्षर होने के करीब तीन वर्ष बाद शुरू होने की संभावना है। भारत ने इस अतिरिक्त खरीद की योजना को मार्च में मंजूरी दी थी। इन प्रणालियों को देश के पश्चिमी और पूर्वी मोर्चों पर तैनात किए जाने की उम्मीद है।
ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 की अहम भूमिका
पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 ने करीब 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तान वायुसेना के एक निगरानी विमान को मार गिराया। इसे जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल की सबसे लंबी दूरी की दर्ज घटनाओं में से एक बताया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि एस-400 ने कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को निशाना बनाया, जिनमें चीन निर्मित जे-10 विमान भी शामिल थे।
इस बीच भारत अपने एस-400 मिसाइल भंडार को मजबूत करने के लिए 280 से अधिक अतिरिक्त मिसाइलें खरीद रहा है। साथ ही, स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली ‘प्रोजेक्ट कुशा’ पर भी काम जारी है। इसके अलावा ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत देशभर में एक व्यापक वायु सुरक्षा कवच विकसित करने की योजना है।
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