उत्तराखंड में भारत-यूएई का संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू, पर्वतीय युद्ध पर रहेगा फोकस
उत्तराखंड में भारत और यूएई की सेनाओं का संयुक्त सैन्य अभ्यास माउंटेन गार्जियन शुरू हुआ। अभ्यास में पर्वतीय युद्धकौशल, ड्रोन संचालन, निगरानी और सामरिक प्रशिक्षण पर जोर रहेगा।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘एक्सरसाइज माउंटेन गार्जियन 2026’ सोमवार को उत्तराखंड में शुरू हुआ। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल, समझ और सहयोग को बढ़ाना है। अभ्यास में विशेष रूप से पर्वतीय युद्ध अभियानों पर ध्यान दिया जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस सैन्य अभ्यास में दोनों देशों के कुल 92 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय और यूएई की सेनाओं से 46-46 सैनिक इसमें शामिल हैं। भारतीय सेना की टुकड़ी में भैरव बटालियन के जवान हैं, जबकि यूएई सेना की ओर से माउंटेन इन्फैंट्री बटालियन के सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों सेनाओं की महिला अधिकारी और महिला सैनिक भी विभिन्न विशेषज्ञ भूमिकाओं में इस अभ्यास का हिस्सा हैं। यह संयुक्त अभ्यास उत्तराखंड के चौबटिया स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में आयोजित किया जा रहा है।
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माउंटेन गार्जियन 2026 का आयोजन 5 से 18 अक्टूबर तक किया जाएगा। अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक संयुक्त योजना तैयार करने, सामरिक अभ्यास, फायरिंग प्रशिक्षण, निगरानी और ड्रोन संचालन जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इसके अलावा शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, रॉक क्लाइंबिंग, बाधा प्रशिक्षण और संयुक्त मैदानी अभ्यास भी किए जाएंगे।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, प्रशिक्षण में तकनीक आधारित सैन्य अभियानों को भी शामिल किया जाएगा। साथ ही कठिन और चुनौतीपूर्ण पर्वतीय इलाकों में अभियानों से संबंधित रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा।
यह अभ्यास दोनों सेनाओं को अपने पेशेवर अनुभव साझा करने और सामरिक दक्षता बढ़ाने का अवसर देगा। इसके साथ ही दोनों पक्ष पर्वतीय क्षेत्रों में सैन्य अभियानों से जुड़ी सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और रणनीतियों को साझा करेंगे।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि माउंटेन गार्जियन 2026 भारत और यूएई के बीच सैन्य सहयोग को और मजबूत करेगा। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास और मित्रता के संबंध भी मजबूत होंगे। अभ्यास के जरिए दोनों सेनाओं को चुनौतीपूर्ण पर्वतीय परिस्थितियों में संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा।
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