भारत-अमेरिका ट्रेड डील को केंद्रीय मंत्रियों ने बताया ऐतिहासिक, कांग्रेस बोली—पीएम ने अंततः किया आत्मसमर्पण
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर टैरिफ 18% होने से सरकार ने इसे ऐतिहासिक बताया, जबकि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर दबाव में झुकने और राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाया।
भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। जहां केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने इस समझौते को “ऐतिहासिक” बताते हुए दोनों देशों के लिए फायदेमंद करार दिया है, वहीं कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि उन्होंने आखिरकार अमेरिका के सामने “आत्मसमर्पण” कर दिया।
इस ट्रेड डील के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है। केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार (3 फरवरी 2026) को इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत और अमेरिका—दोनों अर्थव्यवस्थाओं में विकास को गति देगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगा और भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।
जयशंकर ने कहा कि जब दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तो इसका लाभ केवल दोनों देशों को ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और स्थिरता को भी मिलता है। अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।
हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस समझौते पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिकी दबाव में आकर यह डील की है और इससे भारत के दीर्घकालिक आर्थिक हितों को नुकसान हो सकता है। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी शर्तों के आगे झुककर राष्ट्रीय हितों से समझौता किया है।
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि क्या भारत को इस डील के बदले समान स्तर का लाभ मिला है या नहीं। वहीं सरकार का कहना है कि यह समझौता संतुलित है और इससे भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती मिलेगी। आने वाले दिनों में इस ट्रेड डील के आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों पर व्यापक बहस होने की संभावना है।
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