भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, आगे बढ़ना बेहद मुश्किल: निर्मला सीतारमण
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत गतिरोध पर पहुंच गई है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि आगे बढ़ने के लिए दोनों पक्षों से अधिक समझौता करना बेहद कठिन होगा।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत फिलहाल एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां आगे बढ़ना बेहद कठिन दिखाई दे रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता एक तरह के गतिरोध या ‘पठार’ पर पहुंच गई है। इस स्थिति से आगे बढ़ने के लिए दोनों पक्षों की ओर से और अधिक देने या लेने की गुंजाइश “बहुत” मुश्किल है।
सीतारमण की यह टिप्पणी अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के बयान के कुछ दिनों बाद आई है। ग्रीर ने कहा था कि व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर फिलहाल होने वाले नहीं हैं। उन्होंने बताया था कि भारत और अमेरिका ने कई ऐसे मुद्दों और वस्तुओं की पहचान की है, जिन पर दोनों देशों के बीच अब भी मतभेद कायम हैं और जो समझौते में प्रमुख अड़चन बने हुए हैं।
वित्त मंत्रालय की हालिया मासिक आर्थिक समीक्षा में भी अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर अनिश्चितता जताई गई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि कांग्रेस द्वारा ग्राहम विधेयक पारित किए जाने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अमेरिका के साथ व्यापार संबंध अभी भी अस्थिर बने हुए हैं।
और पढ़ें: ट्रंप ने रूस-ईरान पर नए प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत-चीन पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के सामने नई चुनौती तब पैदा हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम को कानून का रूप दिया। इससे उन्हें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं, पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से अमेरिका में हैं। वह जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में भी शामिल हैं।
और पढ़ें: 12.5 करोड़ लोगों ने वोट दिया: ट्रंप ने भारत और ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर की बड़ी गलती