भारतीय सेना का इबादत-ए-शहादत संग्रहालय: आतंकियों से जब्त AK-47, AK-56 सहित हथियारों का प्रदर्शन
भारतीय सेना ने श्रीनगर में ‘इबादत-ए-शहादत’ संग्रहालय बनाया, जिसमें आतंकियों से जब्त AK-47 और AK-56 हथियार प्रदर्शित हैं। यह जवानों के बलिदान और कश्मीर के इतिहास को दर्शाता है।
भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ अभियानों के दौरान जब्त किए गए हथियारों को श्रीनगर स्थित एक संग्रहालय में संरक्षित किया है। यह संग्रहालय ‘इबादत-ए-शहादत’ के नाम से जाना जाता है, जो पंद्रह कोर (चिनार कोर) मुख्यालय में स्थित है।
सेना के अनुसार, ये हथियार वर्ष 1990 से लेकर अब तक पाकिस्तानी आतंकी संगठनों और आतंकियों से बरामद किए गए हैं। प्रदर्शनी में AK-47, AK-56 राइफल, पिस्तौल और अन्य कई घातक हथियार शामिल हैं। इनमें से कई हथियारों पर गोलियों के निशान भी मौजूद हैं, जो आतंकवाद विरोधी अभियानों की तीव्रता को दर्शाते हैं।
यह संग्रहालय केवल हथियारों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह भारतीय सैनिकों के बलिदान और साहस को श्रद्धांजलि देने का भी माध्यम है। यहां आने वाले लोग उन वीर जवानों को नमन कर सकते हैं, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी।
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भारतीय सेना के अनुसार, 1989 में कश्मीर घाटी में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के फैलने के बाद ये हथियार लगातार बरामद किए जाते रहे हैं। वर्ष 2004 में तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल नीरभय शर्मा ने इन हथियारों को एक संग्रहालय का रूप देने की पहल की थी।
यह संग्रहालय 1924 में बने दो ऐतिहासिक भवनों में स्थित है, जिन्हें पहले महाराजा हरि सिंह के निजी अंगरक्षकों और उनके शस्त्रागार के लिए उपयोग किया जाता था।
इस संग्रहालय का उद्घाटन दिसंबर 2004 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा किया गया था। उन्होंने कहा था कि यह संग्रहालय न केवल हथियारों का प्रदर्शन करता है, बल्कि कश्मीर की संस्कृति, इतिहास और सुरक्षा बलों के बलिदान को भी दर्शाता है।
यह स्थान आज भी आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सेना के संघर्ष और बलिदान की गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
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