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इंडिगो उड़ान रद्दीकरण मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने रिफंड और मुआवजे पर हलफनामा दाखिल करने को कहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडिगो को दिसंबर में उड़ान रद्दीकरण से प्रभावित यात्रियों को दिए गए रिफंड और मुआवजे पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार (22 जनवरी, 2026) को इंडिगो एयरलाइंस को निर्देश दिया कि वह दिसंबर 2025 में बड़ी संख्या में उड़ानों के रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को दिए गए रिफंड और मुआवजे के भुगतान से संबंधित विवरण पर एक हलफनामा दाखिल करे। यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिया।

सुनवाई के दौरान इंडिगो की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि रद्द की गई उड़ानों के लिए यात्रियों का रिफंड पहले ही प्रोसेस कर दिया गया है और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की निर्धारित आवश्यकताओं के अनुसार मुआवजा भी दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन उड़ानों पर सबसे अधिक असर पड़ा था, उन यात्रियों को ₹10,000 के वाउचर दिए जा रहे हैं और इसके लिए एक विशेष वेबसाइट भी शुरू की गई है, जहां यात्री मुआवजे का दावा कर सकते हैं।

पीठ ने इंडिगो को इन तथ्यों की पुष्टि करते हुए दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत अधिवक्ताओं अखिल राणा और उत्कर्ष शर्मा द्वारा दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह दिसंबर के पहले सप्ताह में इंडिगो की सैकड़ों उड़ानों के रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को सहायता और रिफंड सुनिश्चित करे।

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नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, 3 से 5 दिसंबर के बीच कुल 2,507 उड़ानें रद्द हुईं और 1,852 उड़ानों में देरी हुई, जिससे देशभर के हवाई अड्डों पर तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए। इंडिगो ने पायलटों के लिए लागू किए गए नए फ्लाइट ड्यूटी मानकों को समय पर लागू करने की पर्याप्त तैयारी न होने के कारण सैकड़ों उड़ानें रद्द की थीं।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि इंडिगो द्वारा दिए जा रहे ₹10,000 के ट्रैवल वाउचर की एक समय-सीमा है। इस पर पीठ ने पूछा कि यदि कोई यात्री निर्धारित अवधि में वाउचर का उपयोग नहीं कर पाता है, तो उसका क्या होगा। वकील ने इस संबंध में निर्देश लेने की बात कही।

नागर विमानन मंत्रालय और डीजीसीए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि संकट के बाद कई सख्त कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि एयरलाइन के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष को सेवा से हटा दिया गया है, ₹22 करोड़ का जुर्माना लगाया गया है और बेहतर अनुपालन के लिए ₹50 करोड़ की बैंक गारंटी भी मांगी गई है। इसके अलावा, सीईओ और सीओओ सहित कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी गई है।

इस पूरे मामले की जांच के लिए गठित समिति की रिपोर्ट भी अदालत में सीलबंद लिफाफे में पेश की गई। मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।

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