इंदौर में 16 मौतों का कारण दूषित पेयजल हो सकता है, हाईकोर्ट में सरकार का बयान
इंदौर के भगिरथपुरा में दूषित पानी से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से 16 मौतों की आशंका, सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी, मामले की सुनवाई जारी।
इंदौर: मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को बताया कि इंदौर के भगिरथपुरा क्षेत्र में हुई 16 लोगों की मौतें संभवतः दूषित पेयजल से जुड़ी हो सकती हैं। सरकार के अनुसार, इलाके में पिछले एक महीने से उल्टी-दस्त का प्रकोप जारी है, जो कथित तौर पर दूषित पानी के सेवन के कारण फैला।
सरकारी पक्ष ने अदालत को अवगत कराया कि भगिरथपुरा में यह स्वास्थ्य संकट दिसंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हुआ था। स्थानीय निवासियों का दावा है कि अब तक इस प्रकोप में कम से कम 28 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़ों में मौतों की संख्या 16 बताई गई है। मामले ने गंभीर रूप ले लिया है, जिसके चलते प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ कर रही है। अदालत के समक्ष एक साथ दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें भगिरथपुरा में दूषित पानी के सेवन से हुई मौतों की जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
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याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि जल आपूर्ति व्यवस्था में लंबे समय से खामियां थीं, जिनकी अनदेखी के कारण यह त्रासदी हुई। स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए।
सरकार ने अदालत को बताया कि प्रभावित क्षेत्र में जल नमूनों की जांच की जा रही है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। बीमार लोगों के इलाज की व्यवस्था की गई है तथा पेयजल आपूर्ति को अस्थायी रूप से वैकल्पिक स्रोतों से जोड़ा गया है।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और संकेत दिया है कि यदि लापरवाही पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई में जांच रिपोर्ट और राहत उपायों की प्रगति पर विचार किया जाएगा।
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