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इंदौर जल प्रदूषण मामला: मप्र हाईकोर्ट ने जांच आयोग गठित किया, त्वरित न्यायिक जांच की जरूरत बताई

इंदौर के भगीरथपुरा में जल प्रदूषण से मौतों के मामले में मप्र हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित कर त्वरित न्यायिक जांच के आदेश दिए।

इंदौर में पेयजल प्रदूषण के गंभीर मामले पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतंत्र जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला “तत्काल न्यायिक जांच” की मांग करता है और इसकी पड़ताल किसी स्वतंत्र व विश्वसनीय प्राधिकरण द्वारा की जानी चाहिए। न्यायालय ने आयोग को कार्यवाही शुरू होने की तिथि से चार सप्ताह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया है।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने मंगलवार (27 जनवरी 2026) को यह आदेश उस समय पारित किया, जब भगीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत के संबंध में एक साथ दायर कई जनहित याचिकाओं (PIL) पर सुनवाई हो रही थी। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि भगीरथपुरा में उल्टी-दस्त की एक माह लंबी बीमारी के प्रकोप से 16 मौतें संभवतः जुड़ी हो सकती हैं।

सरकार द्वारा प्रस्तुत ऑडिट रिपोर्ट में कुल 23 मौतों का उल्लेख किया गया, जिनमें से 16 को दूषित पानी से फैली बीमारी से जोड़ने की बात कही गई। यह रिपोर्ट शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय के पांच विशेषज्ञों की समिति ने तैयार की थी। रिपोर्ट के अनुसार, चार मौतें बीमारी से असंबंधित थीं, जबकि तीन मामलों में मृत्यु के कारण स्पष्ट नहीं हो सके।

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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से रिपोर्ट के वैज्ञानिक आधार पर सवाल उठाए और “वर्बल ऑटोप्सी” शब्द के प्रयोग पर आश्चर्य भी जताया। न्यायालय ने कहा कि स्थिति चिंताजनक है और मऊगंज (महू) जैसे आसपास के क्षेत्रों से भी दूषित पानी से बीमार पड़ने की खबरें सामने आई हैं। अदालत ने माना कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार को प्रभावित करता है।

हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता को एक सदस्यीय जांच आयोग नियुक्त किया है। आयोग दूषण के कारण, वास्तविक मौतों की संख्या, चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान, मुआवजे के दिशा-निर्देश तथा तात्कालिक और दीर्घकालिक सुधारों पर रिपोर्ट देगा। आयोग को सिविल कोर्ट जैसे अधिकार दिए गए हैं और सभी संबंधित विभागों को पूर्ण सहयोग के निर्देश दिए गए हैं।

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