त्रिपुरा में मनाया गया विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस, आदिवासी समुदायों के योगदान पर जोर
त्रिपुरा के अगरतला में विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में वन संरक्षण, जैव विविधता, पारंपरिक ज्ञान और स्वदेशी समुदायों के योगदान को रेखांकित किया गया।
त्रिपुरा में रविवार को विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस-2026 मनाया गया। अगरतला स्थित सुकांता अकादमी में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी समुदायों के अमूल्य योगदान को पहचानना और उनके अधिकारों, संस्कृति तथा पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण पर जोर देना रहा।
कार्यक्रम के दौरान वन संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक ज्ञान में स्वदेशी समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में आदिवासी एवं स्वदेशी समुदायों का अनुभव बेहद महत्वपूर्ण है।
विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतरराष्ट्रीय दिवस हर वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में स्वदेशी लोगों के अधिकारों, उनकी विशिष्ट संस्कृति, परंपराओं, भाषाओं और जीवन पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही, यह दिवस स्वदेशी समुदायों के सामने मौजूद सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों को सामने लाने का अवसर भी प्रदान करता है।
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अगरतला में आयोजित कार्यक्रम में स्वदेशी समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक विकास की प्रक्रिया में पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय अनुभवों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि वन क्षेत्रों और जैव विविधता की रक्षा के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी आवश्यक है। स्वदेशी समुदाय सदियों से जंगलों, जल स्रोतों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
आयोजकों ने कहा कि स्वदेशी लोगों की संस्कृति और परंपराएं केवल उनकी पहचान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इनमें पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश भी छिपे हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में स्वदेशी समुदायों के योगदान के प्रति सम्मान और समझ को बढ़ावा दिया जा सकता है।
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