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अमेरिकी हमले के बाद ईरान का बड़ा कदम, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बहिष्करण क्षेत्र बनाने की तैयारी

ईरान ने अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बहिष्करण क्षेत्र बनाने की तैयारी की है। क्षेत्र में प्रवेश करने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास नया “बहिष्करण क्षेत्र” घोषित करने की तैयारी की है। ईरान के नवनियुक्त सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद प्रमुख मोहेसन रेजाई ने कहा कि इस क्षेत्र से होकर जलडमरूमध्य पार करने की कोशिश करने वाले चिन्हित जहाजों को प्रतिबंध सूची में डाला जा सकता है।

रेजाई ने रविवार को ईरानी सरकारी टेलीविजन पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नया क्षेत्र आने वाले दिनों या हफ्तों में घोषित किया जा सकता है। उनके मुताबिक, यह क्षेत्र अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी वाले स्थान से शुरू होकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक और वहां से फारस की खाड़ी की दिशा में विस्तृत होगा।

हालांकि, ईरान ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि बहिष्करण क्षेत्र की सटीक सीमा क्या होगी। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी की है, जिसका उद्देश्य तेहरान के तेल निर्यात को रोकना है। अमेरिकी सेना के अनुसार, नाकेबंदी में 20 से अधिक युद्धपोत शामिल हैं और अब तक 92 वाणिज्यिक जहाजों का मार्ग बदला गया है।

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संघर्ष फिर बढ़ा

अमेरिका और ईरान के बीच करीब एक महीने की अपेक्षाकृत शांति के बाद पिछले सप्ताह फिर हमले शुरू हो गए। अमेरिका ने तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान ने अमेरिकी युद्धपोतों की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक अमेरिकी मानवरहित पोत को निशाना बनाया, लेकिन अमेरिकी सेना ने इस दावे को “पूरी तरह झूठ” बताया।

वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, युद्ध से पहले प्रतिदिन औसतन करीब 90 लाख बैरल तेल इस मार्ग से गुजरता था। संघर्ष के बीच जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों और तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकता है।

रेजाई ने अमेरिका के साथ असफल वार्ता में मध्यस्थता करने वाले पाकिस्तान, कतर और ओमान पर भी अविश्वास जताया। उन्होंने कहा कि ईरान अब भविष्य की कूटनीति में ठोस गारंटी चाहता है।

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