ईरान में खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों पर पहली फांसी की तैयारी, 26 वर्षीय युवक को दी जाएगी सज़ा: रिपोर्ट
ईरान में खामेनेई विरोधी प्रदर्शनों के बाद पहली बार एक प्रदर्शनकारी को फांसी देने की तैयारी है। मानवाधिकार संगठनों ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।
ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शनों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए एक युवक को फांसी दिए जाने की तैयारी की जा रही है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 26 वर्षीय एरफान सोलतानी को बिना उचित सुनवाई के बुधवार को फांसी दी जा सकती है। यह ईरान में मौजूदा व्यापक खामेनेई-विरोधी प्रदर्शनों के बाद किसी प्रदर्शनकारी की पहली कथित फांसी होगी।
नॉर्वे स्थित गैर-सरकारी संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने बताया कि सोलतानी को राजधानी तेहरान के पास कराज में हुए प्रदर्शनों के दौरान पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया था। संगठन के मुताबिक, सोलतानी के परिवार को सूचित किया गया है कि उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई है और 14 जनवरी को इसे लागू किया जाएगा।
IHR ने कहा कि अब तक वह प्रदर्शनों में 648 लोगों की मौत की पुष्टि कर चुका है, जिनमें नौ नाबालिग भी शामिल हैं। हालांकि, संगठन ने चेतावनी दी कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है और कुछ अनुमानों के अनुसार यह संख्या 6,000 से भी ज्यादा हो सकती है। इंटरनेट बंद होने के कारण इन मौतों और गिरफ्तारियों की स्वतंत्र पुष्टि करना बेहद कठिन हो गया है। IHR के अनुसार, लगभग 10,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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IHR के निदेशक महमूद अमीरी-मोग़द्दम ने कहा कि हाल के दिनों में आम नागरिक प्रदर्शनकारियों की व्यापक हत्याएं 1980 के दशक में हुए उन अपराधों की याद दिलाती हैं, जिन्हें मानवता के खिलाफ अपराध माना गया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप की अपील की।
एक अन्य संगठन, नेशनल यूनियन फॉर डेमोक्रेसी इन ईरान (NUFD) ने भी सोलतानी की फांसी रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग की। संगठन का कहना है कि सोलतानी का “एकमात्र अपराध ईरान के लिए आज़ादी की आवाज़ उठाना” है।
ईरान में जारी प्रदर्शनों को दबाने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर रैलियां आयोजित की हैं। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन्हें आंदोलन की हार का संकेत बताया है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को चेतावनी दी है और कहा है कि प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई के चलते अमेरिका विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहा है।
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