अमेरिका से समझौते के लिए ईरान की 5 बड़ी शर्तें, होर्मुज जलडमरूमध्य से लेकर जमे हुए फंड तक रखी मांगें
ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित समझौते के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, संप्रभुता के सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और जमे फंड जारी करने जैसी शर्तें रखीं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते की रूपरेखा का खुलासा करते हुए उन प्रमुख शर्तों की जानकारी दी है, जिनके आधार पर दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव को समाप्त किया जा सकता है। "इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग" नामक इस प्रस्तावित समझौते को लेकर अराघची ने कहा कि यदि सहमति बनती है तो यह मौजूदा संघर्ष को समाप्त करने और भविष्य की व्यापक वार्ताओं का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
अराघची के अनुसार, यह समझौता दो चरणों में आगे बढ़ेगा। पहले चरण में उन मुद्दों को शामिल किया गया है जिन पर तत्काल सहमति संभव है, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल विषयों को दूसरे चरण के लिए टाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में परमाणु मुद्दे पर सार्थक चर्चा संभव नहीं थी।
समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा शामिल है। अराघची ने स्पष्ट किया कि संघर्ष से पहले जैसी स्थिति अब नहीं रहेगी। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा के लिए नया ढांचा तैयार किया जाएगा।
ईरान ने यह भी मांग की है कि उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाए। अराघची ने कहा कि अमेरिका पहली बार लिखित रूप में इस्लामी गणराज्य ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने पर सहमत हुआ है। प्रस्ताव के अनुसार दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
इसके अलावा, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने की पेशकश की है। साथ ही विदेशों में जमे हुए ईरानी फंड को मुक्त करने की मांग भी प्रमुख शर्तों में शामिल है।
अराघची ने कहा कि प्रतिबंधों में राहत, आर्थिक पुनर्निर्माण और विकास से जुड़े मुद्दों पर भी आगे की वार्ताओं में चर्चा की जाएगी। यदि यह समझौता सफल होता है तो पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
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