ईरान के जवाबी हमलों से मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकाने तबाह, 13 बेस रहने लायक नहीं
ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों से मध्य पूर्व में अमेरिका के 13 सैन्य ठिकाने बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए, जिससे सैनिकों को हटाना पड़ा और क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर जोरदार जवाबी हमला किया है, जिससे कई ठिकाने भारी नुकसान का शिकार हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद यह कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद क्षेत्र में अमेरिका के 13 सैन्य ठिकाने लगभग रहने लायक नहीं बचे हैं। इन हमलों के कारण अमेरिकी सैनिकों को अपने बेस छोड़कर अस्थायी ठिकानों जैसे होटलों और अस्थायी कार्यालयों में शरण लेनी पड़ी है।
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इज़राइल ने ईरान की प्रतिक्रिया की तीव्रता का सही आकलन नहीं किया था। ईरानी सेना ने लगातार उच्च सटीकता वाले मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे अमेरिकी सैन्य और ऊर्जा ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
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कुवैत में स्थित कई अमेरिकी ठिकानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जिनमें पोर्ट शुआइबा, अली अल सलेम एयर बेस और कैंप ब्यूहरिंग शामिल हैं। इसके अलावा कतर, बहरीन और सऊदी अरब में भी अमेरिकी से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन हमलों से हवाई अड्डों की संरचना, ईंधन पाइपलाइन और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य सुविधाएं नष्ट हो गई हैं। इससे न केवल सैनिकों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है, बल्कि क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी भी कमजोर पड़ गई है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति बेहद गंभीर है और अमेरिका को अब लंबी अवधि के संघर्ष के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
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