ईरान का दावा- अमेरिका के कई लड़ाकू विमान और ईंधन भरने वाले विमान नष्ट किए, जॉर्डन में हमले का दावा
ईरान ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी लड़ाकू विमानों और ईंधन भरने वाले विमानों को मिसाइलों व ड्रोन से नष्ट किया। अमेरिका ने दावे की पुष्टि नहीं की है।
ईरान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी सेना के कई लड़ाकू विमानों और ईंधन भरने वाले विमानों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से नष्ट कर दिया है। ईरान के अनुसार, अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मौजूद कई अन्य विमानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अमेरिका ने ईरान के इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है और इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने रात में किए गए हमलों में खुज़ेस्तान प्रांत के अहवाज़ स्थित बच्चों के कैंसर अस्पताल को निशाना बनाया, जिसमें भारी नुकसान हुआ।
आईआरजीसी ने जॉर्डन के नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने देश में मौजूद “आक्रामक और इस्लाम विरोधी अमेरिकी हितों” को निशाना बनाएं। अमेरिका की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मध्य पूर्व में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। ईरान ने कुवैत, बहरीन और कतर में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। इन देशों ने भी ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों की जानकारी दी है।
ईरान ने सीरिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर भी हमला करने का दावा किया है, हालांकि वॉशिंगटन और सीरियाई सरकार ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
इसके जवाब में अमेरिका ने कहा है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि ईरानी ड्रोन और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी हमलों में अब तक 38 लोगों की मौत हुई है और 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। ईरान ने अपने नागरिकों से बिजली बचाने की अपील भी की है क्योंकि उसके अनुसार अमेरिका ने बिजली केंद्रों को भी निशाना बनाया है।
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह “कहीं भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।” दोनों देशों के बीच पिछले सप्ताह शांति समझौते की घोषणा हुई थी, लेकिन लगातार हो रहे हमलों के बाद इसके भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं।