ईरान युद्ध नहीं चाहता था, हमले के चलते जवाब देने को मजबूर हुआ: भारत में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि
ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि देश युद्ध नहीं चाहता था, लेकिन हमलों के कारण जवाब देना पड़ा। उन्होंने “न युद्ध, न शांति” स्थिति बताते हुए संघर्ष विराम की मांग की।
भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था, लेकिन लगातार हमलों के कारण उसे जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने मौजूदा हालात को “न युद्ध, न शांति” की स्थिति बताते हुए तत्काल संघर्ष विराम की मांग की।
इलाही ने अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये देश अपनी शर्तें दूसरों पर थोपना चाहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर उन्हें यह अधिकार किसने दिया। उन्होंने कहा कि ईरान ने कई बार युद्ध टालने की कोशिश की, लेकिन हालात ऐसे बने कि जवाब देना जरूरी हो गया।
उन्होंने यह भी पूछा कि जो देश इस युद्ध और ऊर्जा संकट से प्रभावित हैं, वे अमेरिका और इजराइल पर दबाव क्यों नहीं बना रहे। इलाही के अनुसार, ईरान और अन्य देशों के बीच ओमान और जिनेवा में बातचीत आगे बढ़ रही थी, लेकिन अचानक हुए हमलों ने प्रक्रिया को बाधित कर दिया।
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इलाही ने दावा किया कि हवाई और मिसाइल हमलों में कई नागरिकों, अधिकारियों और सैन्य कमांडरों की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों और नागरिक ठिकानों को भी निशाना बनाया गया, जिससे भारी नुकसान हुआ।
इसके बावजूद उन्होंने कहा कि ईरान ने बिना शर्त आत्मसमर्पण से इनकार किया और अपनी रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहा। उनका कहना है कि 40 दिनों के संघर्ष के बाद जब विरोधी अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाए, तब संघर्ष विराम का प्रस्ताव सामने आया, जो वास्तव में स्थायी शांति नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में हालात सामान्य हैं और लोग अपने दैनिक कार्य कर रहे हैं। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति को भी उन्होंने स्थिर बताया।
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