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ईरान युद्ध में बढ़ा तनाव, सऊदी अरब ने मिसाइल और ड्रोन हमले रोके

ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने मिसाइल और ड्रोन हमले रोके। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि तेहरान ने युद्धविराम से इनकार किया।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच संघर्ष तेज होने के बीच क्षेत्र में कई नए हमले हुए हैं। इस दौरान सऊदी अरब की सुरक्षा बलों ने महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के पास आने वाली कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया।

चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी गहरा असर डाला है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आवाजाही होती है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है।

इस बीच, तेहरान ने साफ कहा है कि वह युद्धविराम की मांग नहीं करेगा। ईरान का कहना है कि जिन देशों को वह आक्रमणकारी मानता है, उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। यह बयान उस समय आया जब व्हाइट हाउस ने कहा कि संघर्ष तभी समाप्त होगा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह घोषणा करेंगे कि सभी लक्ष्य पूरे हो चुके हैं।

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मंगलवार को ईरान ने खाड़ी के कई अरब देशों पर नए हमले भी किए, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया। वहीं, उत्तरी इराक में हुए एक हवाई हमले में तेहरान समर्थित पांच उग्रवादी मारे गए।

इसी दौरान इजरायल ने आरोप लगाया कि ईरान युद्ध के दौरान क्लस्टर हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। इन हथियारों को बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि वे एक साथ कई छोटे विस्फोटक गिराते हैं, जिससे बड़े इलाके में नुकसान होता है और वायु रक्षा प्रणाली पर भारी दबाव पड़ता है।

दुनिया के 120 से अधिक देशों ने क्लस्टर हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन अमेरिका, इजरायल और ईरान इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं।

ईरान का दावा है कि तेहरान सहित कई शहरों में लगातार विस्फोट हो रहे हैं और अमेरिका-इजरायल के हमलों में अब तक लगभग 10,000 नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में 28 फरवरी से अब तक 1,300 से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है।

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