इसरो के सैटेलाइट ने पकड़े मदर ऑफ ऑल अल नीनो के सबसे स्पष्ट संकेत, भारतीय मानसून पर भी असर की आशंका
इसरो के ईओएस-06 उपग्रह ने प्रशांत महासागर में अल नीनो के मजबूत होने के संकेत पकड़े हैं। वैज्ञानिकों को वैश्विक मौसम और भारतीय मानसून पर असर की चिंता है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के उपग्रह ईओएस-06 यानी ओशनसैट-3 ने प्रशांत महासागर में विकसित हो रहे मजबूत अल नीनो के स्पष्ट संकेत पकड़े हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटनाक्रम आने वाले महीनों में और तेज हो सकता है तथा वैश्विक मौसम के साथ भारतीय मानसून को भी प्रभावित कर सकता है।
इसरो के मुताबिक, 741 किलोमीटर की ऊंचाई से काम कर रहा ईओएस-06 समुद्र की जैविक और वायुमंडलीय गतिविधियों में हो रहे बदलावों पर नजर रख रहा है। उपग्रह ने भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्री उत्पादकता में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की है।
वैज्ञानिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत समुद्र की सतह पर क्लोरोफिल-ए की मात्रा में तेज कमी है। क्लोरोफिल-ए सूक्ष्म समुद्री पौधों यानी फाइटोप्लैंकटन में पाया जाने वाला रंगद्रव्य है और समुद्री खाद्य श्रृंखला की बुनियाद माना जाता है। हैदराबाद स्थित इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के विश्लेषण के अनुसार, जून 2026 में उष्णकटिबंधीय प्रशांत के कुछ हिस्सों में क्लोरोफिल-ए में 2024 और 2025 की तुलना में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।
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ईओएस-06 ने समुद्र की सतही हवाओं में भी बदलाव दर्ज किया है। पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली हवाओं के पश्चिमी दिशा में बदलने को अल नीनो के विकास का प्रमुख संकेत माना जाता है।
इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र के निदेशक डॉ. प्रकाश चौहान के अनुसार, पूर्वी प्रशांत में समुद्र का पानी गर्म होने से गहराई में मौजूद ठंडे और पोषक तत्वों से भरपूर पानी के ऊपर आने की प्रक्रिया कमजोर पड़ती है। इससे फाइटोप्लैंकटन की वृद्धि घटती है, जिसे उपग्रह का ओशन कलर मॉनिटर दर्ज करता है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने भी अल नीनो की स्थिति मजबूत होने का अनुमान जताया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत में फिलहाल मध्यम अल नीनो परिस्थितियां बनी हुई हैं और इनके और मजबूत होने की संभावना है।
भारत के लिए अल नीनो महत्वपूर्ण है क्योंकि मजबूत घटनाएं अक्सर कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून से जुड़ी रही हैं। इससे बारिश, कृषि, मिट्टी की नमी और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है।
ईओएस-06 में ओशन कलर मॉनिटर और स्कैटरोमीटर जैसे उपकरण हैं, जो समुद्री जीवन, हवाओं और महासागर-वायुमंडल की गतिविधियों पर नजर रखते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो की पुष्टि के लिए समुद्र की सतह का तापमान, समुद्र स्तर और अन्य संकेतकों की भी लगातार निगरानी जरूरी होगी।