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4 सितंबर को हॉकआई उपग्रह लॉन्च कर वापसी की तैयारी में इसरो, जीएसएलवी एफ17 से EOS-5 होगा रवाना

इसरो 4 सितंबर को जीएसएलवी एफ17 से EOS-5 उपग्रह लॉन्च करेगा। मिशन का उद्देश्य आपदा निगरानी क्षमता बढ़ाना और लगातार पृथ्वी अवलोकन के जरिए महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) करीब आठ महीने बाद एक महत्वपूर्ण प्रक्षेपण मिशन के साथ वापसी की तैयारी कर रहा है। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन के मुताबिक, 4 सितंबर की सुबह जीएसएलवी एफ17 रॉकेट के जरिए EOS-5 उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। यह मिशन ऐसे समय हो रहा है जब ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) लगातार दो विफलताओं के बाद जांच और परीक्षण के दौर से गुजर रहा है।

EOS-5 को पहले जीआईएसएटी-1ए के नाम से जाना जाता था। यह एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसे करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से भारत के भूभाग पर लगातार नजर रखने के लिए तैयार किया गया है। उपग्रह दिन में कई बार भारतीय भूभाग की तस्वीरें लेने में सक्षम होगा।

इससे चक्रवात, बाढ़, बादल फटने, जंगलों में आग और अन्य तेजी से बदलने वाली प्राकृतिक घटनाओं की निगरानी में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों, मौसम वैज्ञानिकों, कृषि योजनाकारों और सुरक्षा एजेंसियों को लगभग वास्तविक समय में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी।

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इस मिशन का इसरो के लिए भावनात्मक महत्व भी है। 12 अगस्त 2021 को जीएसएलवी एफ10 से EOS-03 उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन स्वदेशी क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में तकनीकी समस्या के कारण मिशन विफल हो गया था। EOS-5 को उस असफल मिशन का उत्तराधिकारी माना जा रहा है।

इसरो अध्यक्ष ने बताया कि मार्च 2027 तक संगठन सात और प्रक्षेपण करने की योजना बना रहा है। इनमें गगनयान कार्यक्रम का बहुप्रतीक्षित जी1 मिशन भी शामिल है, जो पहला मानवरहित परीक्षण मिशन होगा। मौजूदा वित्तीय वर्ष में इसरो 12 उपग्रह तैयार करने और आठ प्रक्षेपण यान मिशन संचालित करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।

EOS-5 को जीएसएलवी मार्क-2 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस रॉकेट का पीएसएलवी से अलग इंजन और महत्वपूर्ण प्रणोदन प्रणाली है। हाल ही में इसी रॉकेट ने नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) उपग्रह को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया था।

इसलिए EOS-5 मिशन केवल एक और उपग्रह का प्रक्षेपण नहीं है, बल्कि यह इसरो के लिए विश्वसनीयता, तकनीकी क्षमता और महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रमों की दिशा में महत्वपूर्ण वापसी का संकेत भी माना जा रहा है।

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