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मॉस्को में इसरो-रोसकोसमोस की बैठक, सेमी-क्रायोजेनिक इंजन आपूर्ति पर समझौता प्रक्रिया तेज

इसरो और रोसकोसमोस के बीच सेमी-क्रायोजेनिक इंजन आपूर्ति पर मॉस्को में चर्चा हुई, जिसका मसौदा अनुबंध मंजूरी प्रक्रिया में है और इससे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोसकोसमोस के बीच सेमी-क्रायोजेनिक इंजनों की आपूर्ति को लेकर मॉस्को में महत्वपूर्ण तकनीकी चर्चा हुई है। इसरो की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, दोनों एजेंसियों के बीच इस संबंध में मसौदा अनुबंध (ड्राफ्ट कॉन्ट्रैक्ट) फिलहाल अनुमोदन की प्रक्रिया में है।

सेमी-क्रायोजेनिक इंजन अंतरिक्ष प्रक्षेपण के लिए अत्याधुनिक तकनीक माने जाते हैं, जो अधिक दक्षता और उच्च थ्रस्ट प्रदान करते हैं। यह तकनीक भारत के भविष्य के लॉन्च व्हीकल कार्यक्रमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर भारी उपग्रहों और गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए।

मॉस्को में हुई इस बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने तकनीकी पहलुओं, आपूर्ति प्रक्रिया और सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। इस संभावित समझौते से भारत को अपनी स्वदेशी क्षमताओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी, साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी बढ़त मिल सकती है।

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इसरो लंबे समय से सेमी-क्रायोजेनिक इंजन तकनीक के विकास पर काम कर रहा है, लेकिन रूस के साथ सहयोग से इस प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, जैसे ही मसौदा अनुबंध को अंतिम मंजूरी मिलती है, दोनों एजेंसियों के बीच औपचारिक समझौता किया जाएगा। इससे भारत के लॉन्च व्हीकल कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिल सकता है।

यह सहयोग भारत-रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे अंतरिक्ष साझेदारी संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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