जयपुर में युवा समूह ने निकाली जन आक्रोश रैली, विरासत संरक्षण और पलायन के मुद्दे उठाए
जयपुर में रविवार को युवा समूह ने ‘जन आक्रोश रैली’ आयोजित कर ऐतिहासिक परकोटे की विरासत बचाने और क्षेत्र से लगातार हो रहे स्थानीय लोगों के पलायन पर चिंता जताई।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार को एक बड़े युवा समूह ने ‘जन आक्रोश रैली’ का आयोजन किया। रैली के माध्यम से ऐतिहासिक परकोटे वाले शहर की विरासत के संरक्षण और क्षेत्र से लगातार हो रहे स्थानीय लोगों के पलायन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया।
आयोजकों का कहना है कि जयपुर का ऐतिहासिक परकोटा केवल शहर की पहचान नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, वास्तुकला और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। समय के साथ बदलती परिस्थितियों और बढ़ते दबाव के बीच इसके संरक्षण की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
रैली में शामिल लोगों ने ऐतिहासिक शहर के पुराने स्वरूप, पारंपरिक भवनों और सांस्कृतिक पहचान को बचाने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विरासत क्षेत्र में रहने वाले लोगों की समस्याओं पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
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रैली का एक प्रमुख मुद्दा ऐतिहासिक परकोटे वाले क्षेत्र से स्थानीय निवासियों का लगातार पलायन रहा। आयोजकों के अनुसार, कई परिवार विभिन्न कारणों से पुराने शहर से बाहर जा रहे हैं। इससे ऐतिहासिक क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना प्रभावित होने की आशंका है।
युवा समूह ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि विरासत संरक्षण की योजनाओं को केवल ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि वहां रहने वाले लोगों की जरूरतों और सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जाए। उनका कहना है कि स्थानीय निवासियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराकर क्षेत्र में रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
रैली के दौरान प्रतिभागियों ने जयपुर की ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने और शहर के पुराने हिस्से में रहने वाले लोगों की समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि विरासत संरक्षण और स्थानीय आबादी की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए मुद्दे हैं।
आयोजकों ने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जयपुर के ऐतिहासिक परकोटे की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान कमजोर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से विरासत विशेषज्ञों, स्थानीय निवासियों और युवा संगठनों के साथ मिलकर दीर्घकालिक योजना तैयार करने की मांग की।
‘जन आक्रोश रैली’ के जरिए युवा समूह ने यह संदेश देने की कोशिश की कि जयपुर की ऐतिहासिक विरासत को बचाने के साथ-साथ उस विरासत से जुड़े लोगों को भी शहर के विकास के केंद्र में रखा जाना चाहिए।
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