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जयशंकर ने भारत-लक्ज़मबर्ग साझेदारी, पड़ोस नीति और पाकिस्तान संबंधों पर दिया बयान

जयशंकर ने लक्ज़मबर्ग को महत्वपूर्ण साझेदार बताया, द्विपक्षीय सहयोग और तकनीकी साझेदारी पर जोर दिया और पाकिस्तान पर आतंकवादी शिविरों का समर्थन करने का आरोप लगाया।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को भारत-लक्ज़मबर्ग संबंधों और पड़ोस नीति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत लक्ज़मबर्ग को एक “बहुत महत्वपूर्ण” साझेदार मानता है और दोनों देशों के बीच वित्त, निवेश, तकनीकी नवाचार, फिनटेक, अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की अपार संभावनाएं हैं।

जयशंकर इस समय फ्रांस और लक्ज़मबर्ग की छह दिवसीय यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने लक्ज़मबर्ग के प्रधानमंत्री लुक फ्रिडन के साथ बैठक की और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए वित्तीय, निवेश और तकनीकी क्षेत्रों में कई पहलुओं पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच सहयोग से दोनों देशों को आर्थिक और तकनीकी लाभ होगा और भविष्य में साझेदारी और गहरी होगी।

पड़ोस नीति और पाकिस्तान संबंधों पर बात करते हुए, जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को “असाधारण” करार दिया। उन्होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बड़े शहरों में खुलेआम आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों का समर्थन करता रहा है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ सकारात्मक और शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, लेकिन आतंकवाद और हिंसा को वह कभी स्वीकार नहीं करेगा।

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जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत वैश्विक मंच पर जिम्मेदार और सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने निवेश, तकनीकी नवाचार और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को दोनों देशों के लिए फायदेमंद बताया। उन्होंने दोहराया कि भारत अपने पड़ोसियों के साथ संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है, लेकिन आतंकवाद फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ हमेशा सख्त रुख रखेगा।

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