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ड्रग्स और आतंक का गठजोड़ खत्म होगा: LG मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर के लिए 3-चरणीय रणनीति की घोषणा

जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स और आतंक के गठजोड़ को खत्म करने के लिए 100 दिन का अभियान शुरू किया गया है। इसमें सप्लाई चेन तोड़ने, जागरूकता और पुनर्वास पर जोर दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर में नशे और आतंकवाद के कथित गठजोड़ को खत्म करने के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक व्यापक तीन-चरणीय रणनीति की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि नशे का कारोबार केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है, जिससे सख्ती से निपटना जरूरी है।

इस दिशा में जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 11 अप्रैल से एक विशेष 100 दिवसीय अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य नशे के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और समाज में जागरूकता फैलाना है।

यह रणनीति “3-पी” (3-P) मॉडल पर आधारित है, जिसमें तीन प्रमुख पहलू शामिल हैं—
पहला, डिसरप्शन (Disruption) यानी नशे की सप्लाई चेन और नशा-आतंक नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ना। प्रशासन का लक्ष्य ड्रग्स की अवैध सप्लाई को जड़ से खत्म करना है।

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दूसरा, अवेयरनेस (Awareness) यानी जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करना। इसके तहत हर व्यक्ति तक पहुंचकर नशे के दुष्प्रभावों और इसके सामाजिक खतरों के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि युवा पीढ़ी को इससे दूर रखा जा सके।

तीसरा, रिकवरी (Recovery) यानी नशे की लत से प्रभावित लोगों का इलाज और पुनर्वास। सरकार का फोकस ऐसे व्यक्तियों को मुख्यधारा में वापस लाने पर है, जो पहले से इस समस्या से जूझ रहे हैं।

एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि नशे का कारोबार समाज को अंदर से कमजोर करता है और इससे निपटने के लिए प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और समाज सभी को मिलकर काम करना होगा।

अधिकारियों के अनुसार यह अभियान पूरे केंद्र शासित प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और इसमें पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

सरकार का दावा है कि इस अभियान से न केवल ड्रग्स नेटवर्क पर चोट होगी, बल्कि युवाओं को सुरक्षित भविष्य भी मिलेगा।

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