जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा, बीजेपी विधायकों ने जन मुद्दों पर सरकार से मांगा जवाब
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र में बीजेपी ने बिजली, रोजगार और कर्मचारियों के मुद्दे उठाकर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सत्ता पक्ष ने राज्य का दर्जा बहाली की मांग उठाई।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र की शुरुआत सोमवार को श्रीनगर में तीन पूर्व मंत्रियों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। इसके बाद सदन में बिजली दरों में बढ़ोतरी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों की मांगों और दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण जैसे मुद्दों को लेकर जमकर हंगामा हुआ।
विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक विभिन्न जन समस्याओं को लेकर नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार से एनएचएम कर्मचारियों की लंबित मांगों, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याओं, रोजगार, बिजली-पानी की आपूर्ति और दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण पर जवाब मांगा।
बीजेपी विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने प्रदर्शन को सदन की कार्यवाही में दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया और विधायकों से अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। हालांकि, प्रदर्शन जारी रहने से सदन में शोर और अव्यवस्था की स्थिति बनी रही।
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विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि विधानसभा सत्र जनता की उम्मीदों और समस्याओं को उठाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की जिम्मेदारी है कि जिन लोगों की आवाज नहीं सुनी जा रही, उनके मुद्दों को सदन में उठाया जाए।
इसी दौरान सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और सीपीआई(एम) के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा तत्काल बहाल करने की मांग उठाई। सीपीआई(एम) विधायक एम.वाई. तारिगामी ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किए दो साल हो चुके हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता अली मोहम्मद सागर ने भी राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नारे लगाए। अध्यक्ष ने हंगामा कर रहे बीजेपी विधायकों को चेतावनी दी कि सदन में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि सरकार विपक्ष के सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन मुद्दे एक-एक करके उठाए जाने चाहिए।
हंगामे के बाद विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह तक स्थगित कर दी गई। सात बैठकों वाला शरद सत्र 30 सितंबर तक चलेगा।
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